Tuesday, 16th January, 2018

चलते चलते

देश में हरियाली बढ़ाने के लिए हरी सब्ज़ियाँ बैन हों, केवल माँस-भक्षण करें लोग: ग्रीन एजेंसी

16, Dec 2017 By banneditqueen

लोअर परेल, मुंबई: दुनिया की जानी मानी अंतराष्ट्रीय इन्वायरॉन्मेंटल एजेन्सी “प्रेज़र्वेशन आफ़ ग्रीनरी लिमिटेड” (प.ग.ली.) ने एक तीखी हिदायत जारी करते हुए देश के सभी लोगों को सरसों, पालक, मेथी और शिमला-मिर्च जैसी हरी सब्ज़ियों का प्रयोग करने की सख़्त मनाही कर दी है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा हरियाली को पर्यावरण में बरक़रार रखा जा सके। प.ग.ली. ने हरी सब्ज़ियों की बजाए मांसाहार के भक्षण को ज़्यादा तवज्जो दी है।

अब नही खा सकते हरी सब्ज़ी
अब नही खा सकते हरी सब्ज़ी

प.ग.ली. के उप-महानिदेशक श्री ज़ंज़िबार जोगाली ने इस बारे में फेकिंग न्यूज़ से बार की। फ़िश चिप्स का एक पैकेट ख़ाली करते हुए श्री जोगाली बोले, “हमने काफ़ी शहरों का दौरा किया और ये अनुभव किया के कुछ अज्ञात कारणों से शहरों में हरियाली नब्बे के दशक के मुक़ाबले कम होती जा रही है। हमने एनलिसिस करना शुरू किया के आख़िर शहरों की ये हरियाली जा कहाँ रही है? फिर हमने नोटिस किया दरसल गली गली नुक्कड़ नुक्कड़ में सब्ज़ी की रेढ़ी वाले भर भर के सरसों, पालक, मेथी, बथुआ, धनिया, पुदीना, खीरा, शिमला-मिर्च, भिंडी और करेला जैसे हरे रंग की शाक-भाजी रोज़ाना कई किलो मात्रा में बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, बड़े बड़े सूपर मार्केटों में भी कई लम्बे चौड़े शेल्फ़ इनही हरी सब्ज़ियों से पटे पड़े हैं, और ग्राहक उन्हें भारी मात्रा में ख़रीद रहे हैं। इस एनलिसिस से हमने इससे ये निष्कर्ष निकला के हो ना हो शहरों में हरियाली कम होने का यही कारण यही है के देश की जानता हरी शाक सब्ज़ियाँ बहुत खा रही है। इसीलिए पर्यावरण की हरियाली बढ़ाने के लिए इन सभी हरी सब्ज़ियों पर तुरंत अनिश्चितकाल के लिए बैन लगना अत्यंत आवश्यक है।”

जब जोगाली जी से पूछा गया के अमूमन तो हरी सब्ज़ियों को पौष्टिक माना जाता है तो फिर वो क्यों इनके प्रयोग को बैन करना चाह रहे हैं, तो वह क्रोध से उफन पड़े और बोले, “क्या बात कर रहे हो? चिकन में प्रोटीन होता है, अंडे में फ़ैट होता है, सी-फ़ूड में भर भर के ओमेगा-३ होता है। सभी न्यूट्रीयंट भरे पड़े हैं नान-वेज में, आपको सब्ज़ी खानी ही क्यों है भाई? उसके बाद भी विटामिन की कमी लगे तो बी-काम्प्लेक्स ले लो, ज़िंक सप्लिमेंट ऊपर से खा लो। बंद करो यार ये सब्ज़ी खाना, पर्यावरण को बहुत नुक़सान हो रहा है भाई। i want this government to ban all these harmful green foods.”

जब जोगाली जी से पूछा गया के ग्रीन सब्ज़ियों के अलावा कोई और सब्ज़ियाँ खायी जा सकती हैं, तो उन्होंने पहले तो अपना चश्मा साफ़ किया। फिर एक गहरी दार्शनिक टाइप की साँस ली और बोले, “देखिए मैं तो सभी प्रकार की सब्ज़ियों की विरुद्ध हूँ। लौकी और पत्तागोभी गहरे हरे तो नहीं पर हल्के हरे ज़रूर हैं, तो उन्हें भी पर्यावरण में ही रहने दें, खाएँ न। मूली और गाजर ख़ुद तो हरे नहीं, परंतु उनके पत्ते अवश्य हरे होते हैं, तो उनसे भी परहेज़ ही भला। बैंगन का सींग भी हरा ही होता है तो वो भी बैन का भागी है। अब बचते हैं प्याज़ और आलू, तो उनका ही सेवन करें, पर चूँकि आलू मोटा कर देता है, और प्याज़ एसिडीटी कर सकता है तो इनका सेवन भी सम्भालकर ही करें। अब देखिए ना पर्यावरण के चक्कर में मैं तो डाइटिशीयन बन गया हूँ।”

इसके बाद जोगाली जी के कुछ मित्र वहाँ आ पहुँचे जिनके के साथ डिनर के लिए वो सिंगापुर जा रहे थे, तो उन्होंने हमारे किसी और सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया और हमसे विदा लेकर अपने प्राइवट जेट में बैठकर रवाना हो गए। इस लेख के लिखे जाने तक यह भी ख़बर आ रही थे के जल्द श्री जोगाली की ग्रीन एजेन्सी किसी भी मनुष्य के व्यायाम पर बैन लगाने की माँग करने वाली है, क्योंकि उनके अनुसार व्यायाम के समय व्यक्ति गहरी और तेज़ साँसे भरता है और बहुत अधिक मात्रा में कार्बन डायआक्सायड वातावरण में छोड़ता है, जिस कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और पर्यावरण को बेहद नुक़सान पहुँच रहा है।



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