Thursday, 14th December, 2017

चलते चलते

स्वेटर बुनती हुई माँ के भुलवा दिए फंदे, घर में आयी प्रलय

24, Nov 2017 By banneditqueen

इंदौर. ठण्ड शुरू हो चुकी है और घर में ठण्ड की तैयारियां भी, स्वेटर, कम्बल और रजाइयां बक्सों के अंदर से निकल चुकी हैं। मयंक चौरसिया के घर में भी यही माहौल है, सिगड़ी-हीटर सब बाहर निकाल के साफ़ किये जा रहे हैं। मयंक की माँ पिछले हफ्ते ही बाजार से जाकर कई सारे ऊन के गोले और सिलाइयां खरीद लाईं। उनका इस बार मयंक के लिए स्वेटर बुनने का मन था।

knit sweatersपर मयंक ने जैसे ही घर में ऊन के गोले और सिलाइयाँ देखी वह थर-थर कांपने लगा, मयंक ने मन ही मन सोचा कि अब तो पूरा दिन घर से बाहर ही रहना पड़ेगा। दरअसल जब भी मयंक की माँ स्वेटर बुनती, घर में महाभारत होने लगती। जिसे भी स्वेटर बुनने की कला का थोड़ा भी ज्ञान है वो यह तो जानता ही होगा कि स्वेटर बुनते समय फंदे गिन कर डालने पड़ते हैं और अगर आपने बीच में फंदे गिनने वाले को टोक दिया तो वह आसमान सर पर उठा लेता है। बस इसी डर से मयंक ने सोचा कि पूरा दिन घर से बाहर रहने में ही भलाई है।

कल मयंक काफी हिम्मत करके रात एक बजे घर वापस लौटा, जैसे ही अंदर घुसा तो उसकी माँ उस पर चिल्लाने लगी। उसे लगा शायद वह घर इतनी देर से आया है इसलिए शायद उसकी माँ उस पर चिल्ला रही होंगी पर जब उसने माँ से कहा कि ”सॉरी आने में देर हो गयी” तो माँ का जवाब कुछ और ही था। मयंक की माँ ने कहा ”104 फंदे डालने थे, गिनते-गिनते 99वें फंदे पर पहुंची थी कि तभी तूने गेट खोल दिया और मेरा ध्यान भटक गया।” इतना सुनते ही मयंक ने गाड़ी की चाभी उठाई और माँ से कहा ”जब स्वेटर बन जाए तब बता देना, अब मैं तभी घर आऊंगा!”



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