Tuesday, 12th December, 2017

चलते चलते

नहीं लिखा था गाड़ी के पीछे सचिव, ट्रैफ़िक पुलिस ने किया युवक का लाइसेन्स कैन्सल

24, Oct 2017 By Guest Patrakar

ग़ाज़ियाबाद. “चाचा विधायक है हमारे, फूफा सचिव है हमारे” सुनने में यह शब्द कुछ अटपटे लगते है। मगर यह ही शब्द ग़ाज़ियाबाद और गुड़गाँव जैसे इलाक़ों में इतने आम है जितने केजरीवाल के मुँह से मोदी की बुराई। और जब अचानक से ऐसे शब्द सुनाई या दिखाई देना बंद हो जाए तो लोगों का स्वभाव बदलना लाज़मी है। ऐसा ही हुआ ग़ाज़ियाबाद के मनोज यादव के साथ जब केवल उनकी गाड़ी के पीछे सचिव ना लिखे जाने पर ट्रैफ़िक कान्स्टबल ने उनका ड्राइविंग लाइसेन्स ही कैन्सल कर दिया।

चाचा बिधायक हैं हमारे
चाचा बिधायक हैं हमारे

मनोज यादव पिछले कई सालों से ग़ज़ियाबाद में अपनी कपड़ों की दुकान चला रहे है। पिछले बुधवार की रात जब वो अपनी दुकान से वापस अपने ग़ज़ियाबाद आ रहे थे तब वैशाली के पास ट्राफिक कान्स्टबल ने ना सिर्फ़ उनकी गाड़ी रोकी बल्कि उनका ड्राइविंग लाइसेन्स भी स्थगित कर दिया। इसीलिए मनोज ने आग बबूला हो कर इसके विरुद्ध फेकिंग न्यूज़ का दरवाज़ा खटखटाया।

फेकिंग न्यूज़ संवादाता ने ट्रैफ़िक कान्स्टबल से बात की और लाइसेन्स कैन्सल करने की वजह पूछी। ट्रैफ़िक कान्स्टबल हरवीर चौधरी ने पाँच सौ रुपए ले कर बताया “मैं पिछले कई सालों से यहीं ड्यूटी कर रहा हूँ, हर गाड़ी के पीछे विधायक, चेयरमैन, सचिव, मुख्य सचिव या कम से कम जाट-गुर्जर इन्साइड तो लिखा ही होता है। नम्बर प्लेट हो न हो इस तरह की बिना रिश्ता प्लेट की गाड़ी मैंने पहली बार देखी है। इस महानुभाव की गाड़ी के पीछे ऐसा कुछ ना था, ऊपर से जब मैंने लाइसेन्स माँगा तो सौ रुपए देने की बजाय मेरे हाथ में इसने लाइसेन्स दे दिया। अब ऐसे में मैं लाइसेन्स कैन्सल नहीं करूँ तो क्या ललित होटेल में डिनर क़राऊँ इसे”?

इस घटना ने जहाँ पुलिस को कटघरे मेंखड़ा कर दियाहैवहीं समाज के सामने भी एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है- क्या हम दूसरे की पहचान से अपने आपको बड़ा साबित करना चाहते हैं? क्या चाचा का विधायक होने उस चाचा के भतीजे की उपलब्धि है? इस जवाब का सवाल तो देना ही पड़ेगा।



ऐसी अन्य ख़बरें