Thursday, 14th December, 2017

चलते चलते

दिवाली आने से पहले युवक ने फ़ैमिली WhatsApp ग्रुप छोड़ा, घर वालों ने किया ज़मीन-जायदाद से बेदख़ल

20, Oct 2017 By Guest Patrakar

पुणे. आज रौशनी और प्रकाश का त्योहार दीपावली है, पूरा देश इस दिन का काफी बेसब्री से इंतजार करता है। माना जाता है कि ये त्योहार घरों में सुख-समृद्धि लाता है, मगर शायद सबकी क़िस्मत एक जैसी नहीं होती। हम बात कर रहे हैं पुणे निवासी अंकित सिंह की जिनकी लिए ये दिवाली कुछ बुरा समय ले कर आयी है। अंकित को उसके पिता ने न केवल घर से बेघर कर दिया है, बल्कि अपनी जायदाद से भी बेदख़ल कर दिया है। अंकित की ग़लती ये थी कि दिवाली आने से ठीक पहले उसने परिवार वाले तमाम WhatsApp ग्रूप से विदाई ले ली थी।

ऐसे कैसे छोड़ा व्हाट्सप्प ग्रुप
ऐसे कैसे छोड़ा व्हाट्सप्प ग्रुप

दिवाली के लिए बकायदा कई दिन पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। समय के साथ इस त्योहार में भी कई बदलाव आए हैं, वातावरण को ध्यान में रखते हुए लोग पटाखे जलाना कम कर चुके हैं। लोग अपने घर की ही नहीं बल्कि अपने फ़ोन की सफ़ाई भी करने लगे हैं।

नहीं समझे? दरसल, इंडिया अब डिजिटल इंडिया बन चुका है, लोग अब मिलकर नहीं बल्कि WhatsApp इत्यादि में ही शुभकामनाएँ देने लगे हैं, और यही कारण है कि दिवाली के पहले अपने फ़ोन की सफ़ाई कर उसमें नए फोटो के लिए जगह बनाना ज़रूरी सा हो गया है।

अंकित सिंह पुणे में काम करने वाला सॉफ़्ट्वेर इंजीनियर है, और काफ़ी आलसी है। WhatsApp ग्रूप में आने वाले फोटोज और दिवाली के मेसजेज़ से बचने के लिए उसने तमाम ग्रूप से एग्ज़िट किया। ये बात अंकित के पिता को नागवार गुज़री और उन्होंने तुरंत अंकित को फ़ोन लगा डाला। और उसे घर आने के लिए मना कर दिया, और उसे अपनेजायदाद से भी बेदख़ल कर दिया।

अंकित फ़िलहाल अपने दोस्त के घर दिवाली मनाने गया है और आगे क्या होगा वो वक़्त बताएगा या अंकित की क़िस्मत, मगर अंकित के साथ हुई घटना ने हमें ज़रूर एक कड़ा संदेश दिया है, कि भारत में लोग अब डिजिटली भी उतना ही कनेक्ट हो गए जितना वो दिल से हैं, इसलिए एक दूसरे के मेसिज का जवाब न देना, या ग्रूप से विदाई लेना साथ वालों को दुखी कर देता है। तो चलिए इस दिवाली कुछ नया करें, दिल से दिवाली मनाएँ, WhatsApp के फ़ोर्वर्डेड मेसजेस न भेजे ख़ुद से कुछ लिखें। आप सभी को फेकिंग न्यूज़ की ओर से दिवाली की ढेरों शुभकामनाएँ।



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