Friday, 28th April, 2017
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उपवास में पाँच प्लेट फ्राइड आलू और साबूदाने की खिचड़ी खा चुके युवक को दुर्गा माँ ने भक्त मानने से किया इंकार

03, Oct 2016 By banneditqueen

इंदौर. नवरात्रि आते ही सबकी ज़ुबान पर गरबा और उपवास यही दो चीज़ें होती हैं। सर्राफा बाज़ार में रहने वाले पंकज भी इस साल नौ दिन का उपवास कर रहा था। हर साल जब उसकी बहन उपवास करती तब पंकज की माँ साबूदाने की खिचड़ी, वड़ा, सिंघाड़े के आटे का हलवा इत्यादि बनाती। पर पंकज जब भी खाने के लिये कोई भी उपवास का खाना माँगता तो उसकी माँ उसे खाने नहीं देती। इसीलिए इस वर्ष उसने सोचा कि वह भी उपवास रखेगा। पहले दिन सुबह उठने के बाद नहा धोकर वह पास वाले मंदिर गया।

फलाहार खाने के लिए बाज़ार में खड़ा पंकज
फलाहार खाने के लिए बाज़ार में खड़ा पंकज

घर आकर तुरंत उसने माँ से कहा “माँ भूख लग रही है खाना दो।” माँ ने कहा “भूख? तूने तो कहा था तू उपवास रख रहा है।” पंकज ने जवाब दिया “हाँ तो? उपवास में भी तो आलू खिचड़ी वगैरह वगैरह खाते हैं ना ?” माँ ने तुरंत उसके लिये आलू फ्राई किये। कुछ देर बाद पंकज ने मार्केट जाकर फिर दो प्लेट खिचड़ी खाई। शाम को फिर बाहर जाकर उसने बाज़ार से सिंघाड़े की पूड़ी खाई। घर आकर डब्बे से साबूदाना वड़ा जो कि माँ ने पंकज की बहन के लिये रखा था वह भी गप कर गया। जब पंकज की बहन घर आई तब उसने पूछा “माँ फलाहार में कुछ बनाया नहीं क्या ?” तब माँ ने बताया कि डिब्बे में वड़ा रखा है। पंकज की बहन ने जवाब दिया कि “यहाँ कुछ भी नहीं रखा।” माँ तुरंत पंकज के कमरे में गईं तो देखा कि पंकज आराम से बैठकर वड़ा खा रहा था|

माँ ने गुस्से में कहा कि “दिनभर खाना ही खाना था तो उपवास रखा ही क्यों? तेरी बहन ने सुबह से कुछ नहीं खाया और अभी भी कोई शिकायत नहीं कर रही।” पंकज ने कहा “मैं सबसे बड़ा भक्त हूँ।” रात में दुर्गा माँ पंकज के सपने में आई और बोली “पुत्र आगे से मेरे नाम का उपवास मत रखना मैं तुम्हें भक्त नहीं मानती।” सपने के बाद पंकज हड़बड़ा कर उठा। अगले दिन उसने सबको इस सपने के बारे में बताया। बात आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। कई लोग जो फलाहार खाते समय इस घटना के बारे में पढ़ रहे थे उन्होंने फलाहार खाना छोड़ दिया। इस घटना के बाद से लोग पूरी श्रद्धा और ईमानदारी के साथ उपवास रख रहे हैं।



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