Tuesday, 16th January, 2018

चलते चलते

लाखों रूपए की नौकरी छोड़कर खेती करने गाँव आया युवक, टमाटर की पहली फसल हुई चौपट

09, Dec 2017 By Ritesh Sinha

रायपुर. आजकल ऐसे युवक-युवतियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो लाखों रूपए का पैकेज छोड़कर गाँव आते हैं, ताकि खेती-किसानी कर सकें। पता नहीं इन लोगों को खेती-किसानी का चस्का अचानक कैसे लग जाता है? कुछ लोग तो “कूल” दिखने के लिए ऐसी हरकत कर बैठते हैं। “पसंद नहीं आई कैलिफोर्निया की कांक्रीट, गाँव की मिट्टी से मिला प्यार!” -टाइप के हेडलाइन, आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिल जाते हैं। लेकिन कई बार ऐसा डिसीजन उल्टा पड़ जाता है और लेने के देने पड़ जाते हैं।

टमाटर की बरबाद फसल
टमाटर की बरबाद फसल

जैसा कि अंशुल गर्ग के साथ हुआ। अंशुल ने आर्गेनिक खेती करने के चक्कर में गूगल की नौकरी छोड़ दी और अपने गाँव आ गया, ताकि पुश्तैनी जमीन पर आर्गेनिक खेती कर सके। लेकिन गाँव में उसकी किस्मत फूट गई और टमाटर की पहली फसल ही चौपट हो गई। बीस हेक्टेयर में टमाटर डाला था, मुनाफे की बात तो छोड़ दीजिए, घर में सलाद बनाने के लिए भी टमाटर नहीं निकले।

जब अंशुल अपनी नौकरी छोड़कर गाँव आया तो लोकल मीडिया वाले भी हैरान रह गए। सबने पहले पन्ने पर अंशुल को जगह दी और उसका इंटरव्यू भी छापा। ‘परदेस’ फिल्म के डायलॉग फिर से जीवित हो उठे। अखबार में अपनी फोटो देखकर वह भी खुश हो गया कि ‘चलो! अच्छा डिसीजन लिया!’ लेकिन अंशुल आने वाले तूफ़ान से अनजान था। बेमौसम बरसात से आधी फसल बरबाद हो गई और आधी देखरेख के अभाव में। बचा-खुचा काम गाय-बकरियों ने कर दिया। नतीजा यह हुआ कि पूरी जमीन से ढाई सौ ग्राम टमाटर भी नहीं निकले।

फेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए अंशुल ने बताया कि, “मुझे लगता था कि ये बहुत आसान होता होगा! और गूगल छोड़ने से पहले मैंने टमाटर की खेती के बारे में रिसर्च भी किया था, लेकिन पता नहीं क्या हुआ, कुछ हाथ ही नहीं आया!”-कहते हुए अंशुल अपने लैपटॉप में कुछ पीडीएफ फाइल दिखाने लगा।

“मुझे तो लगता था कि इन लोगों को खेती करना नहीं आता लेकिन मैं गलत था! खैर! इस बार मैं भिंडी उगाने के बारे में सोच रहा हूँ! अगर इस बार भी घाटा हुआ तो वापस चला जाऊंगा!”-कहते हुए अंशुल, बाज़ार से एक किलो टमाटर लेने निकल पड़ा।



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