Thursday, 25th May, 2017
चलते चलते

लोकल ट्रेन में भी परिवारवाद, सीट खाली होने पर अपने परिवारवालों को बिठाने पर बवाल

22, Apr 2017 By banneditqueen

मुंबई. ‘परिवारवाद’, यह सभद सुन आपके दिमाग में शायद गाँधी परिवार मुलायम परिवार या बच्चन और कपूर परिवार की याद आए। आम जनता हमेशा से ही नेताओं और बॉलीवुड के लोगों पर परिवारवाद करने का आरोप लगाती आई है। जनता चाहती है कि नेता का बेटा नेता ना बने पर जनता कभी अपने गिरेबान में झाँकने की कोशीश नहीं करती।

आखिर कब तक परिवारवाद चलेगा
आखिर कब तक परिवारवाद चलेगा

जी हाँ आप सोच रहे होंगे कि गरीब जनता कैसे परिवारवाद को बढ़ावा देती है। पर कल विरार की ओर जा रही लोकल में ये साबित हो गया की भारतीय जनता में परिवारवाद कूट कूट कर भरा है। कल खचाखच भारी लोकल में चार लोगों का एक परिवार सेकंड क्लास डब्बे में घुसा। बड़ी मुश्किल से एक ही सीट मिली तो बाप ने अपने बेटे को उसकी माँ रीमा के साथ बैठा दिया। रीमा ने बैठते ही अपने बगल वाली भाभी जी से पूछ लिया की वे कौनसे स्टेशन पर उतरेंगी। बगल में बैठी भाभी जी दो स्टेशन बाद ही उतरने वाली थी। पहला स्टेशन जाते ही रीमा ने अपने पति को अलर्ट कर दिया कि ”अगले स्टेशन पे ये सीट खाली हो जाएगी तो आप मुन्नी को लेकर बैठ जाना।” सामने बैठी महिला का पति भी काफी देर से लोकल में खड़े होकर सवारी कर रहा था और उसने इन दोनों महिलाओं की बात सुन ली।

जैसे ही रीमा के बाजू वाली महिला सीट से उठी रीमा का पति और सामने वाली महिला का पति दोनों सीट पर झपट्टा मारने के लिए खड़े हो गए।  सीट को लेकर दोनों में बहस होने लगी। तभी इस बारे में चर्चा शुरू हुई कि  आखिर परिवारवाले ही क्यों बैठेंगे? बाकी जनता जो इतने देर से कड़ी है  नहीं बैठ सकता? लोकल ट्रेन में सवारी करने वाले लोगों की मांग है की लोकल ट्रेन में होने वाले परिवारवाद पर नकेल कासी जाए



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