Monday, 23rd April, 2018

चलते चलते

बजट पर कुमार विश्वास, सिद्धू और जावेद अख़्तर की मज़ेदार शायरी

02, Feb 2018 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. साल 2018 का बजट आ गया है, इस मौक़े पर हमने देश की जानी-मानी हस्तियों से उनकी राय पूछी है। आप भी पढ़िए उन्होंने क्या कहा इस बजट पर :-

Kumar_Vishvas
बजट पर शायरी करते तीन महान शायर

जावेद अख्तर (ट्विटर शायर):

हो..ओ….. इस बजट को देखा तो ऐसा लगा..

इस बजट को देखा तो ऐसा लगा.. 

जैसे जेटली की चाल, जैसे BCCI का हाल

जैसे व्यापम का केस, जैसे रणवीर का भेस

जैसे मोदीजी की यात्रा, जैसे संबित पात्रा

इनका नहीं कोई मैच, कामरान अकमल का कैच

जैसे… बिना सिलेंडर का कोई हस्पताल…..

हो…..ओ……

कवि कुमार विश्वास (दर्दीले शायर) :

सियासतदानों को इस बात का एहसास होता है

बजट के दिन कोई हँसता, कोई ‘भें’ करके रोता है !

इलेक्शन की सदा फिर भी, आयकर कम नहीं किया

कि इस विश्वास को भी देर से विश्वास होता है !!

पकौड़ेवाला (नए-नए सेलेब्रिटी शायर):

चौक पे ठेला डाल के, भजिया लिया बनाय

आया ग्राहक खा गया, दौ सौ दिया कमाय।

दो सौ दिया कमाय, मोदी के अफसर आए

रोजगार की लिस्ट में, जबरन नाम चढ़ाए।।

मनमोहन सिंह (मौनी शायर)** :

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नवजोत सिंह सिद्धू (ऑलराउंडर शायर) :

ओए..गुरु!

है गुरुर आसमान को अपनी उंचाई पर

अपनी देखरेख में बाज़ से बीस चक्कर लगवा देंगे

तारीफ कर दूँ इस बजट की मैं अगर

तो क्या वो कपिल शर्मा का शो फिर से शुरू करवा देंगे?

खटाक..! ठोको…ठोको, अब मत रोको!

रेणुका चौधरी (शॉपिंग शायर):

मैं अकेली भी जा सकती हूँ, शॉपिंग को मगर

इस महंगाई में बिल चुकाएगा कौन?

ताक़ीद हमने की थी, कई दफा तुम्हें

अब जेटली के कहर से बचाएगा कौन?

सोचती हूँ कि बजट को आराम से पढ़ लूँ

पर सात सौ की जैकेट दिलाएगा कौन?



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