Wednesday, 23rd August, 2017

चलते चलते

नानी के घर पहुँचे बच्चों को नानी ने 'कितने पतले हो गए हैं' बोलकर दिन में 10 बार खिलाया खाना

04, Apr 2017 By banneditqueen

लखनऊ. गर्मी की छुट्टियाँ शुरू होते ही बच्चे एक ही रट लगाकर बैठे होते हैं कि नानी के घर जाना है। उधर नानी-नाना भी साल भर बस गर्मी की छुट्टियों का इंतज़ार करते हैं। एक तरफ नानी तरह तरह के पकवान बनाने की तैयारी में लग जाती हैं और दूसरी तरफ बच्चे भी इस तैयारी में लग जाते हैं कि कब छुट्टियाँ शुरु हों और हम नानी के घर जाकर धमाचौकड़ी मचाएँ। नानी की सबसे बड़ी चिंता होती है नाती-नातिन की सेहत। उनके नाती नातिन भले ही कितने ही सेहतमंद हों उन्हें हमेशा ही लगता है कि बच्चों ने कुछ नहीं खाया और ना ही उन्हें खाने मिलता है।

बच्चों के लिए खाना बनाती नानी
बच्चों के लिए खाना बनाती नानी

जबलपुर के रहने वाले पिंकी और पप्पू भी हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नानी के घर लखनऊ गए। नानी के घर पहुँचते ही नानी ने कहा ”हाए राम!!! कितने कमज़ोर हो गए हो दोनों, मम्मी खाने को नहीं देती क्या कुछ?” फिर नानी ने अपनी बेटी सुनीता की तरफ देखकर कहा ”क्यों री सुनीता मेरे बच्चों को खाना नहीं देती क्या? इन्हें यहीं छोड़ जा दो तीन महीना खिला खिला कर मोटा कर दूँगी।” सुनीता ने जवाब दिया ”क्या करूँ मम्मी कुछ खाते ही नहीं हैं। दिन भर मोबाइल, टीवी इसी में लगे रहते हैं।” बच्चे नहा धोकर बाहर निकले ही थे कि नानी ने पाँच -दस आलू के पराठे सेक दिये और जब तक बच्चों ने सारे पराठे खत्म नहीं किए तब तक वहाँ से नहीं हटी।

पर दो दिन में ही बच्चों की हालत खराब हो गई, नानी सुबह से लेकर रात कर हर एक घंटे में कुछ ना कुछ खाने के लिए देती रहती। बच्चे मना करते तो नानी डाँट कर चुप करा देती और कहतीं ”शरीर के नाम पर माँस तो है ही नहीं केवल हड्डी ही है। खाओ चुपचाप, ये खत्म करो फिर एक ग्लास लस्सी भी दूँगी।” इस प्रताड़ना से तंग आकर अब बच्चे घर जाने की ज़िद लगाए बैठे हैं। पिंकी का कहना है कि ”जब से आए हैं हम सिर्फ खाना ही खा रहे हैं। ऐसा लगता है बस खाना खाने ही आए हैं।”



ऐसी अन्य ख़बरें