Sunday, 25th February, 2018

चलते चलते

94% अटेंडेंस वाले छात्र को JNU से प्रिन्सिपल और टीचर्स ने धक्के मार के निकाला

24, Jan 2018 By Guest Patrakar

दिल्ली. JNU अजब-ग़ज़ब क़िस्सों का पिटारा है, चाहे वह भारतविरोधी नारे लगाना हो या झाड़ियों में कॉंंडम मिलना, JNU में आपको हर तरह के किस्से सुनने को मिलेंगे। बीते दिनो ही एक क़िस्सा सुनने को आया जहाँ एक छात्र को JNU से केवल इसीलिए निकाल दिया क्यूँ कि उसकी अटेंडेंस 94% थी।

MA हिस्ट्री फ़र्स्ट ईयर के छात्र वरुण बैसवाल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसे पिछले सोमवार कॉलेज से केवल इसीलिए निकाल दिया जाएगा क्यूँ कि उसकी अटेंडेंस 94% से अधिक है। लेकिन यह सच है, प्रिन्सिपल और टीचर्ज़ ने उसे कॉलेज से धक्के मार के निकाला।

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क्लास से बाहर आते बच्चे

हमने इस बारे में पीड़ित वरुण से बात कि उसने बताया “मैंने DU से ग्रैजूएशन की थी, वहाँ भी मैं काफ़ी पंक्चुअल था। मुझे हाइयस्ट अटेडेंस के चलते अवार्ड भी मिला था। वो ही सोच के मैं JNU में भी आम बच्चों की तरह रोज़ कॉलेज आता और क्लास भी लेता। जब पिछले हफ़्ते हमारे अड्मिट कार्ड के लिए अटेंडेंस जानी थी तो मेरे टीचर ने बताया कि तुम्हारी 94% अटेंडेस है तुम्हें प्रिन्सिपल ने बुलाया है। मैं बहुत ख़ुश था कि शायद मुझे यहाँ भी ज़्यादा अटेंडेंस के लिए नवाज़ा जाएगा। लेकिन उन्होंने मुझे आते ही पीटना चालू कर दिया और बिना कोई वजह बताए धक्के मार के कॉलेज के गेट से बाहर निकाल दिया।”

हमने इस मामले की जाँच की और पता लगाया कि ऐसा प्रिन्सिपल साहब ने केवल इसलिए किया क्यूँ कि वरुण की अटेंडेंस आम छात्रों के विपरीत 94% थी।

हमने इस बारे में वरुण के प्रोफ़ेसर से बात भी बात की उन्होंने कहा “ यह वरुण की ग़लती के कारण ही हुआ है। हमारी उस पर कई दिनो से नजरे थी। वह रेग्युलर क्लास लेता था, असायन्मेंट भी टाइम से बनाता था, हम यह सब भी सह लेते लेकिन उसने आज तक कभी कोई क्लास बंक नहीं करी थी। ना ही कभी आज़ादी वाले नारे लगाए। ऐसा ना करने से बाक़ी बच्चों पर ग़लत असर पड़ता है। भैया जब आप शुद्ध शाकाहारी हो तो लखनऊ के इमाम बाड़ा जा ही क्यूँ रहे हो? जब आपको क्लासे ही लेनी है तो JNU में आते क्यूँ हो?”

सवाल लाज़मी है। यह तो वही बात हो गई बंगाल जा कर बोलो मैं फ़िश नहीं खाता हूँ दाल बाटी दे दीजिए। ख़ैर वरुण के पिता ने JNU के प्रिन्सिपल पर पुलिस केस दायर कर दिया है। लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पा रही है। क्यूँ कि ऐसा करने से भारत में इंटोल्लरेंस बढ़ सकती है, फ़्रीडम ऑफ़ इक्स्प्रेशन ख़तरे में आ सकते है और वरुण के पिता मोदी के अजेंट घोषित किए जा सकते है।



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