Sunday, 22nd October, 2017

चलते चलते

एक सर्वे के अनुसार नोटबंदी के बाद इंसानियत और दया-भावना में आया 300% उछाल

22, Dec 2016 By banneditqueen

एजेंसी. नोटबंदी के चलते अचानक लोगों के अंदर का इंसान जाग उठा है। हर कोई नोटबंदी के बाद बुज़ुर्गों और गरीबों की चिंता करने लगा है। गरीब सब्जीवाले  से 5 रुपये की धनिया पर मिर्ची फ्री माँगने वाले लोगों को अब उस की रोज़ी रोटी की चिंता सताने लगी है। वो सब्ज़ीवाला जो यूँ भी 500-1000 का नोट लेने में आना-कानी करता था। अचानक आए इस बदलाव पर ऑल इंडिया क्रूर संघ ने सर्वे किया तो पाया कि लोगों की दया भावना का अचानक इजाफा हुआ है। तकरीबन 5000 लोगों से इस सर्वे में जानकारी ली। सर्वे के अनुसार तकरीबन 200% ह्रदय परिवर्तन उन महिलाओं में आया जिन्होनें अपने घर में काम करने वाली बाइयों की पगार रोक कर रखी थी। फेमस जर्नलिस्ट दीपा घोष ने अपने नए सोने के कंगन खनकाते हुए बताया “मेरे घर में काम करने वाली शीला के पास अब बिल्कुल पैसे नहीं थे, मैं भी कहाँ से देती? पढ़े लिखे होने के बावजूद भी ना तो मैं ऑनलाइन ट्रांस्फर कर पा रही थी। मोदी जी ने ये ठीक नहीं किया।”

सर्वे द्वारा जारी किया गया ग्राफ
सर्वे द्वारा जारी किया गया ग्राफ

वहीं जेएनयू के छात्र रोमिल ने कहा “पास वाली चाट की दुकान पर 3000 रुपये का उधार है, बस जिस दिन मैं उसे पैसे देने की सोच रहा था उसी दिन नोटबंदी का ऐलान हो गया। मेरा मन तो यह सोचकर बैठा जा रहा था कि अब उसका घर कैसे चलेगा?” सर्वे ने यह भी बताया कि दिनभर ऑनलाइन रहने वालों में यह बदलाव सबसे ज्यादा देखने को मिला। अपनी गर्लफ्रेंड के लिये ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे ललित ने पेटीएम ऐप यूज़ करते हुए बताया कि “जी देखिये आज तक तो कभी मैंने गरीबों के बारे में नहीं सोचा पर अब सोचने में क्या बुराई है? अगर मैं सोशल मीडिया पर उनकी मदद कर सकता हूँ तो क्या गलत है? अब मेरा धोबी भले ही सोशल मीडिया पर ना हो पर दुनिया को दिखाने में कया हर्ज़ है?”

इस सर्वे पर एक बीजेपी नेता ने बयान दिया “अब छुट्टा नहीं मिल रहा तो इसमें सरकार कोई मदद नहीं कर सकती आप चाहते थे काले धन का खात्मा हो तो वही हो रहा है और इस कोशिश में काले धन को सफेद करें तो क्या गलत है? हम कहते हैं ऑनलाइन पेंमेंट करो। आज ही छोटू को मैंने ऑनलाइन पेमेंट करना सिखाया वो बोला साहब ना तो मेरा बैंक अकाउंट है ना ही मुझे पढ़ना आता है| मैंने उसे डाँट कर चुप करा दिया कि देश के लिये इतना नहीं कर सकता?” सर्वे ने यब भी खुलासा किया नोटबंदी के बाद लोगों में देश के लिये कुछ करने का जज़्बा भी अचानक बढ़ा है।



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