Sunday, 25th February, 2018

चलते चलते

मुंबई लोकल में चढ़ने के लिए युवक ने रख लिए 2 बाउंसर, फिर भी रह गया स्टेशन पर

08, Feb 2018 By बगुला भगत

एजेंसी. मुंबई की लोकल ट्रेन में चढ़ना और उतरना एवरेस्ट पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं माना जाता। वे क़िस्मत वाले होते हैं, जो इसमें चढ़ पाते हैं और सकुशल अपने स्टेशन पर उतर पाते हैं। कई दिन से लोकल में चढ़ने में नाकाम एक युवक ने दो बाउंसर भाड़े पर रख लिए लेकिन उसकी क़िस्मत ने फिर भी उसका साथ नहीं दिया!

Mumbai Local7
इसी भीड़ में कहीं खो गया शोभित

शोभित सक्सेना नाम का ये युवक पिछले महीने ही दिल्ली से मुंबई शिफ़्ट हुआ है और मलाड में रह रहा है। ऑफ़िस जाने के लिए वो रोज़ साढ़े आठ बजे मलाड स्टेशन पे आ जाता और 20-25 ट्रेनों में चढ़ने की नाकाम कोशिश करता और किसी तरह दोपहर को 12 बजे किसी ट्रेन में चढ़ पाता। कई बार तो वो निराश होकर स्टेशन से ही घर वापस लौट जाता था।

कल फिर उसे लंच टाइम पे ऑफ़िस में घुसता देख उसके बॉस ने उसे नौकरी छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया- “या तो कल से टाइम पे ऑफ़िस आओ या नौकरी छोड़ दो!”

मजबूर होकर उसने ऑफ़िस से लौटते ही 2 हट्टे-कट्टे बाउंसर रख लिए और अपने साथ-साथ उन दोनों के भी फ़र्स्ट क्लास के मंथली पास बनवा लिए। पर क़िस्मत का खेल देखिए! आज सुबह जब उनकी मदद से उसने बोरीवली-चर्चगेट लोकल में चढ़ने की कोशिश की तो दोनों बाउंसर तो ट्रेन में चढ़ गये लेकिन शोभित प्लेटफ़ॉर्म पर ही रह गया।

ट्रेन को जाता देख वो “मेरे बाउंसर…मेरे बाउंसर” चिल्लाया और सर पकड़कर बैठ गया। तभी उसके बाजू में खड़े एक पैसेंजर ने सलाह दी, “जितने पैसों में तुमने ये बाउंसर रखे हैं, उससे दस गुना कम में तो तुम ‘एसी लोकल’ का पास बनवा लेते!”

यह सुनते ही वो फिर से टिकट काउंटर पर गया और एसी लोकल का मंथली पास बनवा लिया। लेकिन जैसे ही बनवाकर लौटा तो पता चला कि एसी लोकल का तो मलाड स्टेशन पर स्टॉप ही नहीं है! उसके फिर से पकौड़े लग गये!



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