Sunday, 25th February, 2018

चलते चलते

एजुकेशन लोन के बाद लिया युवक ने मुद्रा लोन, पकौड़े बेचकर चुका दिए दोनों लोन

10, Feb 2018 By Guest Patrakar

एजेंसी. बीते दिनो प्रधानमंत्री मोदी के पकोड़े वाले बयान को विपक्ष और मीडिया ने ख़ूब उछाला। जिसके कारण प्रधानमंत्री मोदी को ट्रोल्ज़ का सामना करना पड़ा। लेकिन कोई था

उनके भाषण का सही रूप से इस्तेमाल करके अपनी ज़िंदगी बदल दी। हम बात कर रहे है मुंबई के विकास दीक्षित की जिन्होंने वड़ा पाव की दुकान खोल कर न केवल अपना एजुकेशन लोन पूरा कर दिया बल्कि जिस मुद्रा लोन से दुकान खोली थी वह लोन भी पूरा कर दिया।

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लोन के लिए पैसा कमाता पकोड़े वाला

प्रधानमंत्री मोदी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की उनके हल्के फुल्के भाषण से किसी पर इस कदर असर हो जाएगा। दरसल मोदी ने पिछले दिनो एक प्रेस मीट के दौरान कहा था कि पकोड़े बेचने वाला बेरोज़गार नहीं है। वो भी एक तरह का रोज़गार है। जिसके बाद लोगों ने उनका ख़ूब मज़ाक़ उड़ाया था। काँग्रेस के कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि एक चायवाले के सोच पकोड़े तक ही सीमित रह सकती ही। जिस पर काफ़ी विवाद हुआ था। लेकिन मुंबई के वाशी इलाक़े के विकास ने तो जैसे इस भाषण से अपनी ज़िंदगी ही बदल ली।

हमने विकास से बात की और उनकी इस सक्सेस स्टोरी की पूर्ण जानकारी ली। विकास ने बताया “मेरे पिताजी ने मुझे महँगे एजुकेशन लोन ले कर इंजीनियरिंग करायी थी। यह सोच कर के जब लड़का इंजीनियरिंग पूरी कर लेगा तब अपना एजुकेशन लोन ख़ुद भर लेगा। परंतु मार्केट में नौकरी के नाम पर कुछ नहीं मिला। हालात इतने बुरे थे की मैंने एक बार तो रामगोपाल वर्मा की आग देख कर ख़ुदख़ुशी तक करने की भी सोच ली। मगर फिर मैंने मोदी जी का भाषण सुना और उनकी वह पकोड़े वाली बात मेरे मन को छू गई। मैंने सोचा की जब एक इंसान चाय बेच कर PM बन सकता है। तो मैं पकोड़े बेच कर अपना लोन तो चुका ही लूँगा। मैंने तुरंत सरकारी मुद्रा लोन लेकर एक वड़ा पाव और मिर्ची पकोड़े का ठेला लगाया। आप यक़ीन नहीं करेंगे मैंने महीने भर में ना केवल अपना एजुकेशन लोन चुका दिया बल्कि मुद्रा लोन भी चुका दिया। हालाँकि दुःख है कि इतनी महँगी पढ़ाई करने के बावजूद मुझे नौकरी नहीं मिली। मगर ख़ुशी भी है कि मैंने अपने पिताजी का सरदर्द दूर कर दिया।”

विकास की इस कहानी को जहाँ भाजपा वाले मोदी जी और उनके विकास की जीत बता रहे है। वहीं काँग्रेस ने विकास दीक्षित को भाजपा का एजेंट क़रार कर दिया है। उनका कहना है कि हम सालों से देश बेच रहे तब हमारा फ़ायदा नहीं हुआ। यह पकोड़े बेच कर अमीर कैसे बन सकता है।

काँग्रेस ने मोदी जी के पकोड़ा भाषण के खिलाफ पकोड़े बेच के प्रदर्शन भी किया लेकिन उन्हें वो भी उलटा पड़ गया जब लोगों ने मुफ़्त में उनके पकोड़े भी खा लिए और फिर भी TV पर मोदी जी की तारीफ़ कर दी।

काँग्रेस की हालत अजगर की क़ैद में फँसे उस लोमड़ी जैसी हो गई है जो जितना हिल रही है उतना ही उसकी क़ैद में फँसती जा रही है। पकोड़ा कांट्रवर्सी से ना उन्होंने मोदी को एक बार फिर मुफ़्त की पब्लिसिटी दे दी बल्कि पकोड़ोवालों का मज़ाक़ उड़ा कर मिडल क्लास के वोट भी खो दिए। ख़ैर प्रधानमंत्री ने इस सब पर कोई टिप्पणी नहीं दी है। ऐसे में यह देखना बहुत ज़रूरी होगा कीं इस कांट्रवर्सी का आने वाले मेघालय और कर्नाटक चुनाव में कितना असर पड़ता है।



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