Saturday, 19th August, 2017

चलते चलते

माँ के कहने पर युवक ने अपने गिरेबान में झाँक कर देखा, 25 साल पहले खोई पिता जी की चप्पल मिली

11, Sep 2016 By चीखता सन्नाटा

मैनपुरी. शास्त्रों में लिखा है कि माता-पिता के चरणों के नीचे जन्नत होती है, लेकिन 30 वर्षीय बेरोजगार युवक धुरिया को क्या पता था कि एक दिन अचानक उसे वही जन्नत अपने गिरेबान के अंदर मिल जाएगी।

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धुरिया के बापू की वही पवित्र चप्पल

हुआ यूं कि रोज की तरह मटरगश्ती करने के बाद धुरिया जब घर देर से पहुंचा तो उसकी माँ ने उसे डपट लगाई और अपने गिरेबान ने झाँक लेने को कहा। हर रोज मां की बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देने वाले धुरिया को आज माँ की बात बुरी लगी और अपनी पूरी जिंदगी में उसने पहली बार अपने गिरेबान ने झाँक कर देखा लिया और तभी उसे गिरेबान के भीतर अपने पिता जी की पुरानी चप्पल पड़ी मिली।

“पहलै लगौ अक धुरिया बहाने बना रहो है, पर जब हमनै चप्पलन पै धुरियाँ के बापू कौ नाम देखो तो यकीन आ गओ।”, धुरिया की माँ राम दुलारी अपने मुंह में साड़ी का पल्लू दबाते हुए शरमाते हुए बोली। “जही चप्पलन नै पहन कै तो धुरिया के बापू हमारौ गौना करान आये हते।”

धुरिया ने बताया कि यह चप्पल उसके पिता ने उस पर तब फेंक कर मारी थी, जब वह 5 साल का था और खेल-खेल में नाक के छर्रे बनाने के अभ्यास में जुटा था। अभ्यास के दौरान उसने एक छर्रा अपने पिता को मारा जिससे उसके पिताजी के माथे पर गुमडा पड़ गया। अपने बेटे की इस कामयाबी पर खुश होकर इनाम में उसके पिता जी ने अपनी पुरानी रबड़ की चप्पल उसे फेंक के मारी, जिससे उसके गाल पर लाल निशान बन गया। बस उस दिन आखिरी बार दिखाई देने के बाद पिता जी की वो दिव्य चप्पल लुप्त हो गयी। वर्षो बाद आज उसी चप्पल के अचानक दर्शन पाकर उसका जीवन धन्य हो गया।

इस घटना के बाद धुरिया का घर किसी तीर्थस्थल में बदल गया है। घटना की खबर लगते ही दूर-दूर से लोग उस दिव्य चप्पल के दर्शनों के लिए भागे-भागे आ रहे है।



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