Monday, 27th February, 2017
चलते चलते

कार के पीछे भागते कुत्ते से कार वाले ने रोककर पूछा, आखिर चाहते क्या हो? कुत्ते की बोलती बंद

27, Oct 2016 By Pagla Ghoda

गुरुग्राम, हरयाणा: गुरुग्राम के सेक्टर पांच  के कुकुर समुदाय में उस समय खलबली मच गयी जब एक कुत्ते से कुछ ऐसे सवाल किये गए जिनका के उसके पास कोई जवाब नहीं था। एक कार के पीछे भागते कुत्ते शेरू की हालात तब पतली हो गयी जब कर चालक ने अचानक कार रोक कर उससे पूछ डाला, “के होगया भाई मारा पीछा क्यों करे सै? चाह्त्ता क्या है भाई?” जिसके जवाब में शेरू बगलें झाँकने लगा। मौकाए वारदात पर मौजूद लोगों के अनुसार शेरू उस समय, “वो मैं..”, “लेकिन.. “, “मैं तो …” के सिवाए कुछ कह नहीं पाया। और उसके बाद से तीन दिन हो चुके हैं और शेरू अब किसी भी कार के पीछे नहीं भाग रहा है। वो बस अब केवल के पेड़ के नीचे चुप चाप अपनी पूँछ मुहँ में दबाये बैठा रहता है, और जाने क्या सोचता रहता है। बारह नंबर के घर में रहनी वाली हॉट एयर होस्टेस मैडम अगर खाने को कुछ दें तभी खाता है नहीं तो भूखा ही रह जाता है। शेरू के इस व्यवहार से उसके मित्र कॉलोनी के कुत्ते ही नहीं, बल्कि कॉलोनी के कई पशु प्रेमी काफी चिंतित हैं।

कार के पीछे भागते कुत्ता
कार के पीछे भागते कुत्ता

कुत्तों के विशेषज्ञ डॉक्टर डोबी पट्टेवाला जो इसी कॉलोनी में रहते हैं उन्होंने भी इस मामले में टिप्पणी की। उन्होंने बताया, “देखिये कुत्तों में कुछेक मनुष्यों जैसी ही आदतें और विचारधाराएं होती हैं, जिस कारण वो मनुष्यों के इतने करीब भी होते हैं। और हर मनुष्य के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब वो अपने जीवन की राह को थाम कर एक पल रुकता है और अपने पूरे जीवन काल का अवलोकन करता है। शेरू से जो प्रश्न पुछा गया वो काफी सीधा सा सवाल प्रतीत होता है परंतु उसने शेरू को किंकर्तव्यविमूढ़ कर दिया है। “तुम आखिर चाहते क्या हो?” ये सुनने में एक सीधा प्रश्न लगता है, परंतु इसके मायने काफी गहरे हैं। शेरू अब अपने भूतकाल अपने पूर्व कृत्यों पर विचार कर रहा है। जो किया, क्यों किया? क्या अर्थ है उसके जीवन का? मुझे भय है के ये existentialist विचारधारा कहीं शेरू को इस जीवन का पूर्णतः परित्याग करने पर विवश न करदे।”

डॉक्टर पट्टेवाला अब एनिमल कंट्रोल डिपार्टमेंट के ज़रिये शेरू के असली माँ बाप का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनसे वो उसके विवाह की बात कर सकें। “शेरू को अब एक पत्नी, एक जीवनसाथी की ज़रुरत है जो उसे इस फलसफे की विचारधारा से निकाल कर एक प्रैक्टिकल दुनियादारी वाली स्तिथि में ला सके। इसके लिए मुझसे जो बन पड़ेगा मैं करूँगा।” डॉक्टर पट्टेवाला ने शेरू का सर सहलाते हुए कहा।



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