Tuesday, 12th December, 2017

चलते चलते

न्यूज़ चैनल पर हो रही थी वायु प्रदूषण पर चर्चा, जमकर किया गया ध्वनि प्रदूषण

15, Oct 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. NCR में पटाखों पर लगे प्रतिबंध के बाद न्यूज़ चैनलों में इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है। जो लोग बचपन से पटाखों से डरते हैं, वे अपना डर छुपाने के लिए “पर्यावरण” की ओर हो गए हैं, और जो बचपन में सुतली बम अपनी जेब में लेकर चलते थे, वे सब इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इनमे से कुछ लोग टिकली फटाका वाले भी हैं, जो दूर से बैठकर तमाशा देखने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।

उधर, अलग-अलग कद-काठी के एक्सपर्ट, टीवी पर बैठकर ध्वनि प्रदूषण का सहारा लेते वायु प्रदूषण को कम करने की तरकीब बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि पटाखे बैन करना इस समस्या का समाधान नहीं है।

इस ध्वनि प्रदूशण क क्य होगा
इस ध्वनि प्रदूशण क क्य होगा

कल रिटबलीक टीवी पर भी इसी मुद्दे पर बहस हो रही थी, बहस के दौरान सभी पैनलिस्ट एक दूसरे पर चिल्ला रहे थे। प्रोग्राम के एंकर भी “आग लगाने” का काम बखूबी कर रहे थे। छोटी सी खिड़की में बैठे एक पैनलिस्ट, गुलजारी लाल जी ने आग उगलते हुए कहा- “अरे जा जा! बहुत देखे हैं, तेरे जैसे एक्टिविस्ट! जब तुमने अपने बेटे की शादी की थी, तो पटाखों से आसमान छेद दिया था, और आज दीवाली पर इन्ही पटाखों पर बैन का सपोर्ट कर रहे हो! ढोंगी कहीं के!”-कहते हुए वे कुछ फोटो दिखाने लगे।

यह सुनकर लालचंद्र सेन जी भड़क गए, उन्होंने उनसे भी ऊँची आवाज में कहा- “देखो! मैंने अपने जीवन में कभी पटाखे फोड़े ही नहीं हैं, इनफैक्ट मैं तो छुरछुरी से भी डरता हूँ! ये सज्जन मुझ पर गलत आरोप लगा रहे हैं! मैं दिल्ली को बचाना चाहता हूँ!”

इतने में एक और पैनलिस्ट ने उन्हें दुत्कारते हुए कहा- “चुप हो जाइए! बड़े आए दिल्ली को बचाने वाले! खुद तो डीजल वाली कार में बैठकर स्टूडियो आए हैं, चले हैं दिल्ली को बचाने!” -कहते हुए सभी गुत्थम-गुत्था हो गए। अब कोई किसी की नहीं सुन रहा था, वायु प्रदूषण रोकने आए लोग ध्वनि प्रदूषण में शिफ्ट हो गए थे। थोड़ी देर में आवाज और ऊँची होती चली गई। इस चर्चा के दौरान इतना ध्वनि प्रदूषण हुआ कि अब दर्शक इस चैनल पर ही बैन की मांग कर रहे हैं।



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