Tuesday, 25th April, 2017
चलते चलते

जब इस्तीफ़ा देकर घर पहुंचे पनीरसेल्वम तो बीवी-बच्चों ने कैसे ली क्लास, पढ़िये पूरा ब्यौराः

06, Feb 2017 By बगुला भगत

चेन्नई. ओ पनीरसेल्वम कल जब तीसरी बार मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा देकर घर पहुंचे तो उनके घरवालों के सब्र का बांध टूट गया। पत्नी विजयलक्ष्मी और दोनों बेटे रविन्द्रन और प्रदीप पूरा खर्चा-पानी लेकर उनके ऊपर चढ़ गये। वो पूरी घटना फ़ेकिंग न्यूज़ के ख़ुफ़िया कैमरे में रिकॉर्ड हो गयी। आप भी पढ़िये वहां कैसी महाभारत हुईः-

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“मेरे सामने तो कभी नहीं झुके ऐसे!” -विजयलक्ष्मी

(पनीरसेल्वम मुंह लटकाये और बगल में फ़ाइलें दबाये घर में प्रवेश करते हैं)

विजयम्मा (ताली बजाते हुए): लो जी…फिर से त्याग करके आ गये सेलू महाराज…वेलकम…वेलकम!

प्रदीपः अरे पानी-वानी लाओ…पापा जी का स्वागत करो…पापा जी रिजाइन करके आये हैं।

रविन्द्रनः पापा, अब तो आप अपना नाम त्यागी ही रख लो…पनीरसेल्वम त्यागी!

(पनीर सोफ़े पे पसर जाते हैं, चेहरा झुका हुआ है)

प्रदीपः हर बार आप औरत से डरकर कुर्सी छोड़ देते हो…शर्म नहीं आती आपको!

विजयम्माः मेरे सामने तो बहुत शेर बनते हो…वहां कैसे भीगी बिल्ली बन जाते हो?

प्रदीपः बताओ! तीन बार सीएम बने और तीनों बार कुर्सी छोड़ दी! पूरी दुनिया में है कोई ऐसा बाप!

रविन्द्रनः इस देश में तो कोई प्रधानी भी ना छोड़े…और ये सीएम पद छोड़ देते हैं। वाह जी वाह! क्या बात है!

प्रदीपः प्रधानी की बात कर रहे हो भैय्या! यहां तो बच्चे क्लास की मॉनिटरी तक नहीं छोड़ते!

विजयम्माः और एक ये हैं…त्यागी जी!

पनीरः मेरी बात तो सुनो… (बोलने की कोशिश करते हैं)

विजयम्माः आज हम कुछ नहीं सुनेंगे…

प्रदीपः एक बात बताओ पापा! आपने भी चाय बेची और मोदी ने भी चाय बेची…

विजयम्माः वो चीफ़ मिनिस्टर से प्राइम मिनिस्टर बन गया।

रविन्द्रनः विरोधी ढाई साल से जान तक के ज़ोर लगा रहे हैं लेकिन बंदा कुर्सी से टस से मस नहीं हो रहा।

विजयम्माः …और तुम बार बार कुर्सी छोड़कर भाग आते हो। पंद्रह साल से कुर्सी छोड़ रहे हो। 2001 में पहली बार सीएम बने थे…अब तक तो कब के पीएम बन जाते।

पनीरः मैं कह रहा था मेरी…  (फिर से बोलने की कोशिश करते हैं, विजयम्मा पकड़कर ज़बरदस्ती बिठा देती हैं)

प्रदीपः उन्होंने कहा बैठ जाओ तो बैठ गये, खड़े हो जाओ तो खड़े हो गये…

विजयम्माः मैं दूध लेने भेजती हूं तो सौ बहाने बनाने लगते हो। और अम्मा-चिन्नम्मा कुछ बोलें तो सामने लेट जाते हो।

पनीर (एकदम ग़ुस्से में): अम्मा-चिन्नम्मा के बारे में कुछ मत बोलो! नहीं तो…

विजयम्माः चलो ठीक है…अम्मा को कुछ नहीं कहती। लेकिन ये चिन्नम्मा? इससे क्यूँ फट रही है तुम्हारी…बोलो!

(तभी पनीर के मोबाइल की घंटी बजती है)

पनीरः जी चिन्नम्मा…जी…जी! (बात करते-करते पहले घुटनों पर बैठते हैं…फिर धीरे-धीरे फ़र्श पर लेट जाते हैं)

विजयम्माः हे भगवान!

पनीर (लेटे-लेटे मोबाइल पर): जी चिन्नम्मा मैम…कप-प्लेट तो धोकर अलमारी में रख दिये थे…चाबी वहीं ड्रॉअर में थी। जी…कौन सी फ़ाइल? अच्छा वो! वो तो वहीं मेज पे ही रखी थी मैंने। अच्छा…मैं आता हूं…अभी ढूंढ के देता हूं… जी…जी दो मिनट में पहुंचता हूं।

विजयम्माः अगर फिर से इस्तीफ़ा देकर आये तो घर में घुसने नहीं दूंगी…सुन रहे हो तुम!

(मोबाइल जेब में रखते हैं और हड़बड़ी में निकल जाते हैं…पीछे से तीनों के चिल्लाने की आवाज़ आती रहती है)



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