Sunday, 28th May, 2017
चलते चलते

'धर्म और जाति के नाम पर नहीं मांग सकते वोट', यह सुनकर वापस किडनैपिंग के धंधे में लौटे कई नेता

02, Jan 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव में धर्म, जाति, भाषा और समुदाय के नाम पर वोट मांगना ग़ैर-क़ानूनी है, बिहार के दो नेता नेतागीरी छोड़कर वापस किडनैपिंग के अपने पुराने धंधे में लौट गये हैं। पॉलिटिक्स छोड़ने वाले दोनों नेताओं का नाम मनोज मुन्ना और राजा भाई बताया जा रहा है। दोनों तथाकथित नेताओं ने फ़ोन करके अपने संभावित क्लाइंट्स को अपडेट करना भी शुरु कर दिया है।

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बर्तनों के नाम पर वोट मांगते नेताजी

उधर, देश के कोने-कोने में इन नेताओं का मज़ाक उड़ना शुरु हो गया है। पांच साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बूढ़े तक सब चुटकी ले रहे हैं। पिछले पांच साल में दस मामलों में 15 बार जेल जा चुके बख़्तावर अंसारी नाम के एक नेता ने हैरानी जताते हुए कहा- “कोर्ट ने कहा और उन्होंने मान लिया!” यह कहकर वो अपना माथा पकड़कर बैठ गये। फिर अचानक बोले- “इसका मतलब वे नेता थे ही नहीं! जो कोर्ट के ऑर्डर से डर जाये, वो नेता हो ही नहीं सकता!”

“वैसे भी कोर्ट ने ना डराने-धमकाने से मना किया और ना पैसे बांटने से! तो फिर वे क्यूं भाग गये?” फिर थोड़ा कूल डाउन होते हुए बोले- “चलो धर्म के नाम पर मत मांगते! लेकिन दारू, लैपटॉप, मोबाइल, प्रेशर कुकर, जूसर-मिक्सर, साड़ी, चावल वगैरह तो सब यहीं पड़े हैं। कोर्ट ने उनके लिये तो मना नहीं किया ना!” -अपने रीबॉक के सफ़ेद जूते पहनते हुए नेताजी बोले।

“भाईसाब, घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायेगा क्या! अभी यूपी में चुनाव आने वाले हैं, वहां देख लेना सुप्रीम कोर्ट के इस ऑर्डर की हालत!” -अंसारी की बगल में बैठे एक दूसरे नेता ने हंसते हुए कहा।

उधर, सु्प्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को सुनकर कई नेताओं के मरने की ख़बरें आ रही है। इनकी मौत डरने की वजह से नहीं बल्कि ज़्यादा हंसने की वजह से हुई बतायी जा रही है। थोड़ी देर पहले स्वर्गवासी हुए एक नेता के चेले समर्थक ने बताया कि “भैय्या जी टीवी की ओर इशारा किये जा रहे थे और ताली बजा-बजाकर हंसे जा रहे थे। अचानक उनका मुंह फटा का फटा रह गया और भैय्या जी टैं बोल गये।”



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