Tuesday, 23rd May, 2017
चलते चलते

फ़क़ीरी का मज़ाक उड़ाने वालों को पीएम मोदी का करारा जवाब, 1 जनवरी से पहनेंगे केजरीवाल जैसे कपड़े

05, Dec 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरादाबाद की रैली में ख़ुद को फ़क़ीर क्या कह दिया, सारे विरोधी उनका मज़ाक उड़ाने लगे। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक सब जगह उनके महंगे और ब्रैंडेड कपड़ों को लेकर तंज़ कसे गये। इतना ही नहीं, उनकी विदेश यात्राओं पर भी चुटकुले बनाये गये।

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“अब मुझे इसके जैसे कपड़े पहनने पड़ेंगे क्या?”

लेकिन मोदी जी ने भी अब उन्हें करारा जवाब देने का मन बना लिया है। अपने विरोधियों का मुँह बंद करने के लिये अब वो अपने सारे महंगे कपड़े त्यागने को तैयार हो गये हैं। कल शाम उन्होंने अपने उन सभी 25 रणनीतिकारों को बुलाया, जो उनकी इमेज और कपड़ों वगैरह का काम देखते हैं और उनसे पूछा कि “क्या मैं सचमुच का फ़क़ीर नहीं लगता? बोलो!”

इस पर उनके चीफ़ इमेज स्ट्रेटेजिस्ट ने कहा “सर, आपसे बड़ा फ़क़ीर तो पूरी दुनिया में नहीं है लेकिन इन कपड़ों की वजह से लोगों को आपके अंदर का वो फ़क़ीर दिखता नहीं है।”

“तो फिर मैं कैसे कपड़े पहनूँ ताकि बाहर से भी फ़क़ीर लग सकूँ? मैं उस केजरीवाल का मुँह कैसे बंद करूं?” -पीएम ने मेज पर मुक्का मारते हुए कहा। इसके जवाब में एक जूनियर स्ट्रेटेजिस्ट ने सलाह दी की “पीएम सर, लोहा लोहे को काटता है। आप केजरीवाल को उसी के गेम में मात दो। समझे कि नहीं?”

“नहीं!” -मोदी जी ने उसके मुँह को हैरानी से देखते हुए कहा।

“देखिये सर, वो केजरीवाल और सारी चीज़ों में तो आपसे बहुत पीछे है। सिर्फ़ कपड़ों की सादगी में आगे है। उसकी शर्ट पैंट के ऊपर निकली रहती है और पैरों में नॉर्मल सी सैंडल पहने रहता है।

“वो इतना सीधा-सादा है नहीं, सिर्फ़ दिखावा करता है। अंदर से तो उसका मन भी मेरी तरह टिप-टॉप रहने का करता है।” -पीएम ने कहा। “यही तो उसकी चाल है। वो समझता है कि आप इन डिजाइनर कुर्तों, जैकेटों, घड़ियों और चश्मों का मोह नहीं छोड़ सकते।” यह सुनकर पीएम अपने कपड़ों पर स्नेह भरी नज़र डालते हुए बोले- “ये बात तो सही…” उनकी बात को बीच में काटते हुए चीफ़ स्ट्रेटेजिस्ट बोला- “ये मोह तो आपको छोड़ना ही पड़ेगा सर! फिर उस केजरीवाल का मुँह हमेशा-हमेशा के लिये बंद हो जायेगा।”

“लेकिन उन पैंट-कमीज और चप्पलों में मैं ट्रंप से कैसे मिलूंगा? गंदा नहीं लगेगा क्या?” -मोदी जी कुछ सोचते हुए बोले।  “गंदा नहीं सर, वो तो और भी अच्छा लगेगा। तब तो सारा मीडिया एक साल तक आपकी सादगी के किस्से ही सुनाता रहेगा!” -चीफ़ मुस्कुराते हुए बोला।

“ठीक है तो फिर! 31 दिसंबर की मध्य रात्रि के बाद मैं एकदम सिंपल कपड़ों में नज़र आऊंगा।” -उन्होंने रैली वाले अंदाज़ में मुट्ठी बांधते हुए कहा। “लेकिन फिर मेरे इन कपड़ों का क्या होगा?” -वो अपने कुर्ते पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोले। “सिंपल वाले कपड़े सिलकर आते ही हम आपके सारे स्टाइलिश कपड़ों की नीलामी कर देंगे और उस नीलामी से मिले अरबों रुपयों को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर देंगे। यानि एक बार फिर वाह-वाह…वाह-वाह!” -कहकर सारे स्ट्रेटेजिस्ट ठहाका मारकर हंस पड़े।



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