Monday, 24th July, 2017
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भरत को पीछे छोड़ पनीरसेल्वम बने सबसे बड़े आज्ञाकारी, स्वर्ग में भी हो रही है जय-जयकार

06, Feb 2017 By बगुला भगत

चेन्नई/स्वर्गधाम. दो-दो बार तमिलनाडु के सिंहासन का त्याग कर चुके ओ पनीरसेल्वम की ख्याति बैकुंठपुरी तक जा पहुंची है और उससे इंद्रदेव का सिंहासन भी डोलने लगा है। जैसे ही पनीर ने कल शशिकला के लिये सीएम की कुर्सी खाली कर दी, उनकी जय-जयकार से पूरा स्वर्ग गूंज उठा। देव-सभा ने एक आपातकालीन बैठक बुलाकर पनीर के पक्ष में ध्वनिमत से एक प्रशंसा प्रस्ताव पारित किया।

“जितनी आसानी से ये इंसान सिंहासन छोड़ देता है, वैसा त्याग तो हमारे लोग भी नहीं कर पाते। गद्दी के लालच में तो हम देवता भी छल-कपट से बाज़ नहीं आते। क्यूं देवराज इंद्र?” नारद मुनि ने राजा इंद्र की ओर शरारती नज़रों से देखते हुए कहा।

“सिंहासन का त्याग करने के मामले में अब तक भगवान राम के छोटे भाई भरत का नाम सबसे ऊपर था लेकिन पनीरसेल्वम नाम के इस बंदे ने उन्हें पीछे छोड़कर आज्ञाकारी नंबर वन का स्थान हासिल कर लिया है। ऐसे इंसान को तो स्वर्ग में होना चाहिये!” -शनिदेव ने नारद मुनि की बात का समर्थन करते हुए कहा।

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अम्मा की चरण पादुकाएँ मांगते पनीरसेल्वम

“राजा भरत ने तो सिर्फ़ एक बार राज सिंहासन का त्याग किया था, जबकि पनीर अब तक दो बार ऐसा त्याग कर चुके हैं। पहले ‘अम्मा’ और अब ‘चिन्नम्मा’ के लिये। अगर ज़रूरत पड़ी तो वो तीसरी बार भी पीछे हटने से पीछे नहीं हटेंगे।”

“और सबसे बड़ी बात! भरत तो राम के सगे भाई थे, इसलिये भाई के लिये सिंहासन छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं थी। पनीर प्राणी का तो अम्मा और शशिकला से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है, फिर भी वो हाथ जोड़कर कुर्सी से उतरकर साइड में खड़े हो जाते हैं। जय हो ऐसे मनुष्य की जय हो!” -ऋषि दुर्वासा हाथ जोड़ते हुए बोले।

“वरना वहां पृथ्वीलोक के यूपी में क्या हो रहा है…देखो! बेटा बाप की साइकिल छीन रहा है, बाप बेटे को पार्टी से निकाल रहा है। भाई भाई को गाली दे रहा है। कोई किसी का सगा नहीं है। सिंहासन के लिये सब आपस में लड़ रहे हैं। काश! हमारे पास भी कोई पनीरसेल्वम होता। ऐसा वफ़ादार अनुयायी बड़े पुण्यकर्मों से मिलता है।” -नारद मुनि ने कहा।

“पनीर ने अपने आचरण से देवताओं, मनुष्यों और पशुओं समेत समस्त प्राणियों को पीछे छोड़ दिया है। कहा जाता है कि इंसान का सबसे वफ़ादार साथी कुत्ता होता है क्योंकि आदमी तो आदमी को हमेशा धोखा ही देता है और अगर बात पॉलिटिक्स की हो तो फिर तो धोख़ा और बेईमानी करना स्वाभाविक ही है। लेकिन यहां भी पनीर ने वफ़ादारी के मामले में कुत्ते को भी पीछे छोड़ दिया।” -कहते हुए सभी देवतागण तालियाँ बजाने लगे।



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