Thursday, 26th April, 2018

चलते चलते

टिकट कटने के बाद कवि कुमार विश्वास का पहला एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

05, Jan 2018 By Ritesh Sinha

केजरीवाल की दिल्ली. ‘आप’ पार्टी के नेता और कवि, कुमार विश्वास दो दिन से सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। जब से उन्हें राज्य सभा का टिकट नहीं मिला है, वो शत्रुघ्न सिन्हा मोड में चले गए हैं। आधे घंटे तक लगातार बोलते हैं, लेकिन ये नहीं पता चलता कि किसके ख़िलाफ़ बोल रहे हैं। इसी मसले पर फ़ेकिंग न्यूज़ ने उनसे ख़ास बातचीत की-

Kumar-Vishwas
अपनी टिकट-व्यथा सुनाते कविवर कुमार विश्वास

रिपोर्टर: अगर आपने कंघी कर ली हो तो सवाल-जवाब शुरू करें?

कुमार विश्वास: नि:संदेह! मैं अपने बालों का ख़ास ख्याल रखता हूँ लेकिन मैं कभी भी एक घंटे से ज़्यादा नहीं लेता!

रिपोर्टर: वैस, डेढ़ घंटा हो गया! अच्छा, ये बताइए आप राज्यसभा क्यों नहीं जा रहे हैं?

कुमार विश्वास: सब दिल्ली के मालिक का किया धरा है! लगता है वो गुप्ताओं की फौज बना रहे हैं! आखिर मुझमें क्या कमी थी? इसी बात पर ‘भाग देहलवी’ का एक शेर याद आता है कि “अब कहाँ गुलशन मिलेंगे, पार्टी फँसी उजाड़ में, आधे विधायक बाहर हैं, बाकि बचे तिहाड़ में! छोटा भाई कह के उसने ऐसा दिया धोखा, रब करे! ऐसा भाई, चला जाए भाड़ में!”

रिपोर्टर: ऐसा लगता है काफी चोट लगी है आपको?

कुमार विश्वास: बेशक! इस तरह जब गुप्त रूप से गुप्ताओं को संसद भेजा जाएगा तो चोट तो लगेगी ही! मैंने पार्टी की इतने दिनों तक सेवा की…और मुझे क्या मिला! मिर्चा ग़ालिब का एक शेर है कि, “इस राजनीति ने ‘ग़ालिब’ हमें निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे दाम के! sorry.. नाम के!”

रिपोर्टर: केजरीवाल, संजय सिंह, आशुतोष के बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे?

कुमार विश्वास: अब इनके बारे में क्या कहें! बस यही है कि “उम्र हमने गुजार दी जिसके जुगाड़ में, बेच दी तुमने वो कुर्सी पैसों की आड़ में!

रिपोर्टर: अच्छा..तो पार्टी में कौन है, जो आपको राज्यसभा नहीं भेजना चाहता?

कुमार विश्वास: एक हो तो बताऊँ! यहाँ सैंकड़ों हैं! इसी बात पे एक शेर और झेल लीजिए- बरबाद-ए-गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था, हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा!”

रिपोर्टर: कुछ लोग कह रहे हैं कि आपने पार्टी को तोड़ने की कोशिश की थी?

कुमार विश्वास: देखिए! यह सरासर झूठ है! अक्खड़ मुरादाबादी कह गए हैं कि, “तोड़ने वाले, फोड़ने वाले, हरदम पैदा होते रहेंगे, टूटे हुए को जोड़ने वाले! जाटन वाले, कॉटन वाले, थूके हुए को चाटन वाले, हरदम पैदा होते रहेंगे!”

रिपोर्टर: रुकिए..रुकिए! ये किस लाइन पे आ गए आप! अच्छा ये बताइए अब आगे का क्या प्लान है?

कुमार विश्वास: बस, अब तो अमित शाह के फोन का इंतज़ार कर रहे हैं! उनका भी फोन नहीं आया तो निकल जाएँगे इंजीनयरिंग कॉलेजों में कविता सुनाने! वही अपना पुराना धंधा।

रिपोर्टर: चलिए आखिर में एक कविता सुना दीजिए!

कुमार विश्वास: ..तो अब तक क्या कर रहा था मैं! खैर, अगर आपने फरमाइश की है तो सुनानी ही पड़ेगी। (कुछ देर सोचने के बाद) तो सुनिए! घोर निराशा में डूबा कवि कहता है कि “इरादा था कि एक दिन हम भी आगे बढ़ के बोलेंगे! पहुँच गए जो सभा के बीच, थोड़ा चढ़ के बोलेंगे! कि बिजली यूँ गिरी हम पर, कि हम बेहोश हो गए! जो कर दे फोन तो अधबीच हम, मोदी के हो लेंगे!”

(तभी उनका फोन बज उठा और वो ‘हैलो..हैलो” करते हुए उठकर साइड में चले गए)



ऐसी अन्य ख़बरें