Friday, 23rd June, 2017
चलते चलते

पत्रकारों ने खोज निकाला आराम फरमाने वाला गधा, प्रधानमंत्री मोदी की खुली पोल

28, Feb 2017 By Ritesh Sinha

लखनऊ. प्रधानमंत्री मोदी ने एक चुनावी रैली में दावा किया था कि गधे कड़ी मेहनत करते हैं और कभी भी आराम नहीं करते। इसलिये वो गधों से प्रेरणा लेते हैं। लेकिन कुछ खोजी पत्रकारों ने ऐसे गधों को ढूंढ निकाला, जो कड़ी मेहनत करने के बजाय सड़क किनारे सुस्ती से टहलते रहते हैं या घास में लोट लगा रहे होते हैं। इन कामचोर गधों की संख्या सात से आठ तक बताई जा रही है। इन गधों ने प्रधानमंत्री मोदी के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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यही है वो कामचोर गधा, जिसे खोल दी मोदी जी की पोल

इन कामचोर गधों को सबसे पहले देखने वाले खोजी पत्रकार अश्व कुमार अश्विन ने बताया कि “मैं यहाँ पर यूपी चुनाव कवर करने आया हूँ, इसी सिलसिले में कुछ लोगों से उनकी राय जानने के लिए मैं नज़दीक के गाँव जा रहा था। तभी मैंने देखा कि कुछ गधे सड़क किनारे लापरवाही से चल रहे हैं। एक गधा तो घास में लेटकर मज़े में ढेंचू-ढेंचू कर रहा था। मुझे अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हुआ। मोदी जी कहते हैं कि गधा कड़ी मेहनत करता है, जबकि कितने सारे गधे हैं, जो मुफ्त की घास तोड़ रहे हैं। मैंने तुरंत इस खबर को ब्रेकिंग न्यूज़ बनाकर अपने चैनल में ब्रेक कर दिया।”

अब ये खबर पूरे देश में फैल चुकी है और बाकी चैनल भी उन गधों को कवर करने के लिए घास-स्थल पर पहुँच रहे हैं। इसी बीच एक बहादुर पत्रकार आगे बढ़ा और उसने गधे के मुंह के पास अपना माइक टिका दिया- “आप इस चुनाव में किस पार्टी को समर्थन दे रहे हैं?” यह सुनकर बुजुर्ग गधे ने जवाब दिया- “हमें पॉलिटिक्स में मत घसीटिए साब! हमें तो बस आराम से लेटे रहने दीजिए!” -यह जवाब सुनकर पत्रकार सकपका गया। फिर अपने आप को संभालते हुए बोला- “अच्छा ये बताइए! आपका फेवरेट कलर कौन सा है? हरा, नीला या फिर केसरिया?”

इतना सुनते ही बुजुर्ग गधा भड़क गया और बोला- “एक ही सवाल घुमा-फिराकर मत पूछो! हम गधे बेशक हैं पर तुम पत्रकारों से ज़्यादा समझदार हैं। बताया ना! हम किसी भी दल को समर्थन नहीं दे रहे हैं।” -कहकर उसने दुलत्ती मार दी। जिसके बाद कोई भी पत्रकार दोबारा उनके नज़दीक नहीं गया और सब दूर से ही उन कामचोर गधों की फोटो लेने लगे। उधर, अखिलेश यादव ने इस खबर का स्वागत किया है। उन्होंने पीएम मोदी पर चुटकी लेते हुए कहा है कि ‘देखिए! मोदी जी आप कहते थे कि गधा मेहनत करता है, अब तो गधे भी कामचोर हो गए हैं। अब आपको ‘उत्ता पिदेस’ की जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए।”



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