Tuesday, 28th February, 2017
चलते चलते

पीड़ित दलितों से मिलने वाले नेताओं की भीड़ बढ़ी, कंट्रोल करने के लिये सरकार ने बनाया टाइम-टेबल

22, Jul 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. देश में दलितों से मिलने वाले नेताओं की भीड़ बढ़ती जा रही है, जिससे दलितों के साथ साथ सरकार को भी काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं सब परेशानियों से निपटने के लिये केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में ‘दलित गमन एवं मिलन (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम’ पेश कर दिया।

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दलित के घर भोजन ग्रहण करते कुछ नेता

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने इस अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि “आज तक देश में दलितों से मिलने का कोई नियम-क़ायदा ही नहीं है। एक ही टाइम पर कई पार्टियों के नेता मिलने पहुंच जाते हैं। सब होच-पोच हो जाता है।”

“इस बिल में हमने ‘दलित-मिलन’ का एक टाइम-टेबल बनाया है। सुबह 8 से 12 बजे तक नेशनल पार्टियों के नेता मिलेंगे, 12 से 4 बजे तक रीज़नल पार्टियों के नेता और उसके बाद एनजीओ वाले मिलेंगे। और फिर भी टाइम बचा तो उनके अपने गांववाले और सगे-संबंधी!”

“एक और प्रॉब्लम है! दलितों से मिलने वाले नेताओं को अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कोई दलित इस अस्पताल में भर्ती है तो कोई उस अस्पताल में। लेकिन हमने इसका समाधान भी ढूंढ लिया है। केंद्र सरकार हर ज़िले में एक स्पेशल हॉस्पिटल बनायेगी, जहां सभी पिटे हुए दलितों का एक साथ इलाज होगा। इससे धन और समय दोनों की बचत होगी। और इन अस्पतालों में आप सभी पत्रकार भाईयों के लिये एक मीडिया रूम भी रहेगा। जिसमें ‘सभी सुविधायें’ रहेंगी।” -सुविधायें सुनकर सभी पत्रकार तालियां बजाने लगे।

“और एक बात और! चूंकि कुछ नेता अब दलितों के घरों पे सोने भी लगे हैं और कुछ उनके घर पे नहाने भी लगे हैं। तो इतने सारे लोगों के तेल-साबुन, खाने-पीने और रज़ाई-बिस्तार का इतंज़ाम करना आसान काम नहीं है। इसलिये हमने ‘अटल सेवा-सत्कार कोष’ बनाया है। जिससे उन दलितों की आर्थिक मदद की जायेगी, जिनके घर पे नेता खायेंगे-पीयेंगे और सोयेंगे।”

उधर, विपक्ष ने इस बिल को लोकतंत्र-विरोधी बताया है। कांग्रेस के प्रवक्ता अजय माकन ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि “अब सरकार हमें बतायेगी कि दलित के घर कब जाना है और कब नहीं! उनके घर पे तो अगर हम रात के 12 बजे भी पहुंच जायें तो वे ख़ुद को धन्य मानते हैं।”



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