Monday, 26th June, 2017
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मैंने पचास दिन नहीं, पचास वर्किंग डेज मांगे थे मित्रों, वो भी सरकारी विभाग के: मोदी

08, Jan 2017 By Pagla Ghoda

नई दिल्ली: एक दिल दहला देने वाली घोषणा में प्रधानमंत्री मोदी जी ने जनता को बताया के जब उन्होंने पिछली बार पचास दिन में हालात सामान्य होने की बात की थी तो वो पचास दिन नहीं बल्कि पचास वर्किंग डेज थे। यानी के पचास कामकाजी दिन, वो भी सरकारी महकमे के कामकाजी दिन, जो महीने में कम ही आते हैं।

क्या आप मेरी बात से सहमत हैं मित्रों
क्या आप मेरी बात से सहमत हैं मित्रों

यूपी में एक उमड़ती हुई जन रैली को संबोधित करते हुए मोदी जी ने ये घोषणा की। पेश है उस रैली के कुछ अंश:

मोदी जी: मित्रों काला धन आएगा, ज़रूर आएगा ..

जेटली जी (पीछे से): काले धन पे आप पहले ही दो घंटे बोले चुके हैं।

मोदी जी: मित्रों, आजकल कुछ शहज़ादे उड़ना सीख रहे हैं। बोलना सीख रहे हैं, बड़ा अच्छा लगता है मित्रों …

अमित शाह: सर ये शहज़ादे का अलिफ़ लैला मत शुरू कीजिये, वो मैं पिछली रैली में राज परिवार पे काफी बोल चुका हूँ।

मोदी जी: मित्रों मुझे बिहार का लिट्टी चोखा बहुत पसंद है, बचपन से ही मेरा एक अटूट नाता सा रहा है  ..

सुषमा जी: (खांसते हुए) मोदी जी हम यूपी में आये हुए हैं।

मोदी जी: मित्रों केवल पचास दिनों का वक़्त चाहिए मुझे …

वेंकैया नायडू: सर पचास दिन हो गया अभी, आगे क्या होना, वो बोलिये जनता को। हमको भी क्यूरोसिटी होता।

मोदी जी: “मित्रों मै क्लीयर कर देना चाहता हूँ, के मैंने आप देशवासियों से पचास दिन मांगे थे। अब आप सोचेंगे के मोदी भूल गया। आप बोलेंगे के पचास दिन तो हो गये मोदी, तुम अब क्या करोगे। तो मित्रों मैंने पचास वर्किंग डेज मांगे थे, यानी के पचास कामकाजी दिन। और सरकारी महकमों के बात करें तो मेरी पिछली घोषणा के बाद से तो अभी बीस भी कामकाजी दिन पूरे नहीं हुए हैं मित्रों। इसलिए सब्र रखिये, पचास दिन पूरे तो होने दीजिये। और जिन्हें सब्र नहीं है मित्रों, मैं उनसे पूछना चाहता हूँ, क्यों जी? सब्र क्यों नहीं है? क्या छिपा रहे हो।”

तीखे अंदाज़ में मोदी जी ने देश भर के करोड़ों भ्रष्टाचारियों पर अगले डेढ़ घंटे तक भंयकर कटाक्ष किये।

रैली में बड़ी दूर से चल कर आये मंगलू तिवारी ने इस बारे में फेकिंग न्यूज़ से बात की, उन्होंने कहा, “अव्वल तो हमें बताया गया था के जहाँ जहाँ मोदी रैली करेंगे वहां वहां एटीएम मशीन भी खोले जायेंगे जिसमे के पांच पांच सौ के करारे नोट निकलेंगे, लेकिन यहाँ तो एटीएम एक भी नहीं है। दूसरी बार सरकारी महकमे के पचास कामकाजी दिन तो अभी एक वर्ष बाद पूरे होंगे। उनकी तो साहब छुट्टियां ही नहीं पूरी होती।”

पंचांग खोलते हुए मंगलू ने आगे बताया, “हम तो पार्ट टाइम पंडित हैं, इसलिए पंचांग साथ रखते हैं। ये देखिये, अभी लोहड़ी, उसके बाद होली, फिर बकरीद है, उसके बाद खिचड़यी, फिर गटारी। और सैटरडे संडे वाले लौंग वीकेंड भी बहुत हैं इस साल, जिसमे सरकारी अफसर LTA का पूरा लाभ उठाते हैं। ऊपर से एक वर्किंग डे में काम भी तो चार ही घंटे होता है सरकारी दफ्तरों में। अच्छा गूगली मारे हैं पीएम साहेब। इस सरकार का कार्यकाल ख़तम हो जायेगा जजमान, पर ये पचास दिन नहीं पूरा होगा, कहे देते हैं।”

रैली में तालियां कम होने पर मोदी जी ने फिर से शहज़ादे पर बोलना शुरू किया तो लोगों में थोड़ा जोश आया। इसी बीच मोदी जी आज की रैली में कितनी बार मित्रों बोलेंगे उसपर सट्टा बाजार भी काफी गर्म हो चूका था। बहुत सारी ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स ने तो ये ऐलान कर दिया था के इस भाषण के दौरान जब जब भी मोदी जी मित्रों शब्द का इस्तेमाल करेंगे उसके अगले पांच मिनट तक ऐप्स पर भारी डिस्काउंट रहेगा। इसी बीच सोशल मीडिया पर मोदी भक्तों और एंटी-नेशनल्स के बीच भयंकर युद्ध भी छिड़ गया था। “पचास हुआ पांच सौ” और “#ज़ोरदारलपेटा” जैसे मुद्दे भी ट्रेंड करने लगे थे। इसी बीच कुछ लोगों ने “आम आदमी पार्टी एकमात्र विकल्प” जैसे मुद्दे भी ट्रेंड करने की कोशिश की पर सफल नहीं हुए।

रैली समाप्त करते हुए मोदी जी भावुक हो गए और उनकी आँखें भर आयी। रुँधे गले से उन्होंने कहा, “मित्रों इन पचास वर्किंग डेज के बाद भी यदि इस देश की सूरत न बदली, तो मैं वायदा करता हूँ के मैं दो हफ्ते तक विदेश यात्रा नहीं करूँगा।” तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंच गूँज उठा, पर रैली में आयी जनता असमंजस में थी के ताली बजाये के नहीं।



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