Friday, 18th August, 2017

चलते चलते

राहुल गांधी को शायरी सिखाने वाले संतोष कुमार 'बेदर्दी' का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

24, Dec 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी पिछली दो रैलियों में शेर सुनाकर पूरे देश को हक्का-बक्का कर दिया है। लोग तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं, जैसे- “ये शेर राहुल बाबा को मिले कहां से?”, “क्या राहुल बाबा आजकर शेरो-शायरी की किताबें पढ़ने लगे हैं?”, “क्या उन्हें किसी से मुहब्बत हो गयी है?”, “अपने पढ़े हुए शेर उनकी समझ में आ कैसे जाते हैं?”

Rahul
राहुल जी अगली रैली के शेर की तैयारी करते हुए

इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिये फ़ेकिंग न्यूज़ ने उस शख़्स से बात की, जो आजकल राहुल गांधी का भाषण लिख रहे हैं। उस शख़्स का नाम है संतोष कुमार ‘बेदर्दी’! पेश है वो पूरा इंटरव्यूः

रिपोर्टरः बेदर्दी जी, लोग इस बात पर सट्टा लगा रहे हैं कि राहुल बाबा अगली रैली में कौन सा शेर सुनाने वाले हैं। इसलिये सबसे पहले आप यही बताइये कि वो अगली रैली में कौन सा शेर सुनाने वाले हैं?

बेदर्दीः राहुल जी अगली रैली में मोदी पर अल्ताफ़ राजा के शेर से ताना मारेंगे कि ‘तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे…अगली वाली फ़्लाइट से फॉरेन चले जाओगे’।

रिपोर्टरः इसका मतलब ये सारे शेर उन्हें आप ही लिखकर दे रहे हो?

बेदर्दी (शर्माते हुए): जी हां!

रिपोर्टरः हम तो समझ रहे थे कि उनके हाथ कोई ‘जीजा-साली की शायरी’ वाली किताब हाथ लग गयी है।

बेदर्दीः ये सब क्या बोल रहे हैं आप! जीजा-साली सुनते ही तो वो लड़ने लगते हैं। उनके सामने मत बोलना कभी।

रिपोर्टरः ठीक है, नहीं बोलेंगे। ये बताइये कि राहुल जी को शेर याद कैसे हो जाते हैं?

बेदर्दीः याद करने की कोई ख़ास टेंशन नहीं है। भाषण की दूसरी लाइनों की तरह वो शेर भी पढ़कर बोल देते हैं।

रिपोर्टर (हैरानी से): और वो उनकी समझ में आ जाते हैं?

बेदर्दीः जैसे भाषण समझ में आ जाता है, वैसे ही… अच्छा ये सब छोड़िये! एक सीक्रेट बतायें आपको?

रिपोर्टरः बताइये…बताइये!

बेदर्दीः राहुल जी ने ख़ुद भी शेर लिखना शुरु कर दिया है।

रिपोर्टरः क्या बात कर रहे हैं! सच्ची-मुच्ची?

बेदर्दीः हां! उन्होंने एक डायरी बना रक्खी है, जिसमें रोज़ रात को सोने से पहले वो अपने शेर लिखते हैं। उस डायरी के कवर पे उन्होंने ‘दिल के अरमाँ’ लिक्खा हुआ है।

रिपोर्टरः दिल के अरमाँ?

बेदर्दीः हां! सॉरी, एक मिनट… (बेदर्दी जी मोबाइल पर बात करने लगते हैं) जी…जी बाबा। मैं अभी पहुंच रहा हूं…पांच मिनट में!

रिपोर्टरः किसका फ़ोन था?

बेदर्दी (उठकर चलते हुए): राहुल जी का फ़ोन था। तुरंत बुलाये हैं। फिर से ‘अंदाज-ए-गुफ्तगू’ का मतलब पूछ रहे हैं…6 बार तो बता चुके हैं…

यह कहकर बेदर्दी जी तेज़ी से निकल गये। लेकिन उन्होंने जाते-जाते हमसे वादा किया कि अगली मुलाक़ात में वो हमें राहुल जी के ‘दिल के अरमाँ’ वाली डायरी लाकर देंगे। तो अगली बार हम आपको राहुल बाबा के ख़ुद के लिखे हुए शेर सुनाएंगे। तब तक के लिये धन्यवाद!



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