Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

डीयू के छात्र संघ (DUSU) चुनाव का नाम होगा अब 'जाट-गुज्जर छात्र संघ' चुनाव (JAGUSU)

13, Sep 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनावों में काफ़ी सालों से जाट और गुज्जर समुदाय के उम्मीदवार ही जीतते आ रहे हैं। चुनाव के दिनों में डीयू कैंपस पर इन्हीं का क़ब्ज़ा हो जाता है। इसलिये डीयू के प्रशासन ने इन चुनावों का नाम बदलकर अब ‘जाट-गुज्जर छात्र संघ चुनाव’ (JAGUSU) करने का फ़ैसला किया है। डीयू के वाइस चांसलर योगेश त्यागी ने यह एलान करते हुए कहा कि “अगले साल से ‘डूसू’ का नाम बदलकर ‘जागूसू’ हो जायेगा।”

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डीयू के छात्रों का दबंग चुनाव प्रचार

“चाहे एबीवीपी और या एनएसयूआई, दोनों के दोनों हर साल किसी जाट या गुज्जर स्टूडेंट (?) को ही अपना टिकट देते हैं। अगर एबीवीपी अपना प्रेसिडेंट कैंडीडेट किसी गुज्जर को बना देती है तो एनएसयूआई अगले ही दिन किसी जाट को उतार देती है। पंद्रह-बीस सालों से डीयू में यही सब हो रहा है।” -त्यागी जी ने बताया।

इस मुद्दे पर जब हमने कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से बात की तो उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि “एक्चुअली, जितने पैसे और मसल पावर डीयू का इलेक्शन लड़ने के लिये चाहिये, उतने पैसे और किसी के पास नहीं हैं! करोड़ों लग जाते हैं भाईसाब! सैंकड़ों गाड़ियाँ चाहिये, लड़ने-मरने के लिये बंदे चाहिये।”

“ऐसे ही नहीं लड़ा जाता चुनाव! ये जेएनयू नहीं है भाईसाब, जहाँ कोई भी भूखा-नंगा ढपली बजा के और पोस्टर चिपका के चुनाव लड़ ले!” -नेताजी ने बाजू चढ़ाते हुए कहा।

“स्टूडेंट्स को दारू-वारू पिलानी पड़ती है, सो अलग! और जो कोई स्टूडेंट वोट देने से मना करे, तो उसे धमकाना-सटकाना भी पड़ता है। हैं किसी और कैंडीडेट में ये सारे गुण?” -नेताजी ने पलटकर हमारे रिपोर्टर से पूछा। “लेकिन इलेक्शन में तो कैंडीडेट सिर्फ़ 5 हज़ार रुपये ही खर्च कर सकता है, लिंगदोह कमेटी ने कहा है कि नहीं?” -रिपोर्टर के इस सवाल पर नेताजी तो चुप रह गये, लेकिन उनके बराबर में खड़े एक छात्र नेता ने कहा, “लिंगदोह कमेटी धरी है म्हारे लिंग पे! चल अब लिकड़ यहाँ सै!” और रिपोर्टर की बाँह पकड़कर बाहर का रास्ता दिखा दिया।

जाते हुए नेताजी ने रिपोर्टर के कान में कहा- “पैसे तो और लोगों के पास भी बहुत हैं। लेकिन इत्ता फालतू खर्चा करने के लिये जितनी मोटी अकल चाहिये, उतनी किसी और के पास नहीं है।” -यह कहकर वो खीं-खीं करके हँसने लगे।



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