Thursday, 27th April, 2017
चलते चलते

सपा के दोनों गुट अलग-अलग ब्रांड की साइकिल को बना लें चुनाव चिन्ह: चुनाव आयोग

09, Jan 2017 By Pagla Ghoda

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के दोनों गुटों में चल रहा गृह युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा। स्वयं सपा प्रमुख मुलायम सिंह जी भी बेटा जी अखिलेश और भाई जी शिवपाल के बीच सुलह नहीं करवा पा रहे, और सबसे बड़ी रस्साकशी तो चुनाव चिन्ह को लेकर हो रही है। दोनों गुट चाह रहे हैं कि साइकिल वाला चुनाव चिन्ह अब उनके गुट के नाम कर दिया जाए और दूसरे गुट को साइकिल की घंटी, चैन या पहिया इत्यादि चुनाव चिन्ह देकर मामला रफ़ा-दफ़ा कर दिया जाये।

akhilesh-mulayam
साइकिल के लिये हाथ जोड़े खड़े अखिलेश और मुलायम

दोनों गुटों की रोज़-रोज़ की चिक-चिक से तंग आकर चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि यदि दोनों गुट अलग-अलग ब्रांड की साइकिल को भी अपना चुनाव चिन्ह बना लेंगे तो भी आयोग उसे स्वीकार कर लेगा। आयोग के वरिष्ठ अधिकारी साधू जाधव (नाम बदला गया) ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, “भाई हम तो साफ कह रहे हैं कि एक गुट जो है वो हीरो की साइकिल ले ले और दूसरा बीएसए की ले ले। जो लेना है ले ले, लेकिन ये रोज़ रोज़ का झगडे करके कृपया हमारी जान ना लें! अपनी-अपनी साइकिल का कलर सेलेक्ट करके नयी पार्टी के नाम के साथ-साथ अपनी चुनी हुई साइकिल का पासपोर्ट साइज़ फोटू हमें भेज दें, हम उसी फोटू को मतदाता पत्र पर छपवा देंगे।”

जहाँ चुनाव आयोग इस मामले पर समझौते के लिए तैयार है वहीं अखिलेश समर्थकों को हड़का कर सपा ऑफिस में घुसे और कुर्सी पर धौंस जमकर बैठे मुलायम सिंह के तेवर शांत होने वाले नहीं दिख रहे। उन्होंने इस विषय पर फेकिंग न्यूज़ को बताया, “हमाये बेया को चाहिए के हमाये से आये हे मिले, सोई बोये, हमाये पाए छू के सोई बोये। सिप्पाल हमाये छोए भाई ह, हमाये पायी की दफ्फर में कार्पे बिछाए हैं। अकलेस मुन्ना हमसे लाए किये तो सैगल क्या घनी भी नहीं देंगे।”

करीब दो घंटे मुलायम और उसके बाद डेढ़ घंटे शिवपाल कुर्सी पर बैठे रहे और अखिलेश समर्थकों से चाय-पानी मंगवाते रहे। उसके बाद अपने पीए को कुर्सी पर बैठाकर मुलायम प्राइवेट जेट से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। जाते-जाते साइकिल के साथ अपने फोटो वाले पैम्फलेट पूरे पार्टी दफ्तर में फैलाते गए, जो मिल रहा था उसे बोल रहे थे, “अकलेस मुन्ना को बोयो सैगल हमायी है, हमायी ही रहेगी।”



ऐसी अन्य ख़बरें