Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

“दलित तुम कितने प्यारे हो, हम सबकी आँख के तारे हो” -नेताजी की मार्मिक कविता

30, Jun 2017 By बगुला भगत

एजेंसी. देश की एक जानी-मानी पार्टी के एक जाने-माने नेताजी ने राष्ट्रपति चुनाव के मौक़े पर यह राजनीतिक-मार्मिक कविता लिखी है-

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कविता सुनकर भाव-विभोर होते मीरा-कोविंद

दलित तुम कितने प्यारे हो

हम सबकी आँख के तारे हो

आओ, तुम्हें हम राजा बनाएँ

इस गौरमिंट का बाजा बनाएँ

झुनझुना, ढोल, बनो मृदंग

झूमो नाचो अब हमारे संग

सुनो जी मीरा, सुनो कोविंद

तुम्हीं गुरु हो, तुम्हीं गोविंद

और नहीं कुछ करना होगा

बस ‘हाँ जी हाँ जी’ कहना होगा

भूलो भी अब बात पुरानी

ऊना-मिर्च के क़िस्से-कहानी

महल के ठाठ पे ध्यान लगाओ

बाहर का हाल सब बिसराओ

जहाँ मुँह खोलो तो जूते लगाएँ

चमड़ी खींचें, नंगा घुमाएँ

गधे सी मानें जात तुम्हारी

बाप बनाने की पर लाचारी

वोटबैंक की हो मजबूरी

वरना बना के रखते दूरी

लाज-शरम सब तुम पे वारी

लगा दो नैया अब पार हमारी

वो रही देखो कुर्सी तुम्हारी

गंगाजल से कैसी निखारी

पाँच साल अब इस पे सिधारो

शाही बग्गी से बाग़ निहारो

ज़रा झुको और मुँह तो खोलो

एक बार हमें थैंक यू बोलो

वोट बैंक के बहते धारे

लगते हो तुम कित्ते प्यारे

दलित तुम कितने प्यारे हो

हम सबकी आँख के तारे हो।।



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