Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

कांग्रेस में होगा बड़ा बदलाव, राहुल गाँधी को हटाने की मांग करने वाले नेताओं को हटाया जाएगा

21, Mar 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. पांच राज्यों में हुए चुनाव में से चार राज्यों में मिले झटके से कांग्रेस पार्टी सदमे में है। पार्टी आलाकमान को एहसास हो गया है कि पार्टी को डूबने से बचाने के लिए अब कड़े फैसले लेने ही होंगे। इसी कड़ी में कल दिल्ली में चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस शिविर की ओर आकर्षित करने के लिए नाश्ता-पानी का प्रबंध रखा गया था। चाय-समोसों पर हाथ साफ़ करते ही सबसे पहले मांग उठी कि पार्टी में बड़ा बदलाव अब हो ही जाना चाहिए। यह सुनकर वहां मौजूद सभी नेता ख़ुशी से झूम उठे। लेकिन जैसे ही दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस बारे में फ़ैसला करने का पूरा अधिकार राहुल जी को मिलना चाहिए, सभी कार्यकर्ता वापस निराशा में डूब गए।

Congress Meet2
हार के लिये ज़िम्मेदार आदमी पर चर्चा करते कांग्रेसी नेता

इसके बाद उन लोगों की बारी आई जो दबी जुबान में राहुल गाँधी को हटाने की बात करते रहते हैं। दस सेकेंड में उनकी बात सुनने के बाद फ़ैसला हुआ कि उन सभी नेताओं को पार्टी से हटा दिया जाये, जो राहुल जी को हटाने की बात कर रहे हैं। पार्टी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए इसे एक एतिहासिक कदम बताया जा रहा है।

चिंतन शिविर से बाहर आते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्गी राजा ने बताया कि “देखिए! हमने इस शिविर में गहन चिंतन किया कि आखिर हम लगातार चुनाव क्यों हार रहे हैं? इस पर कपिल सिब्बल जी ने कहा कि जो लोग राहुल जी को हटाने की मांग करते हैं उन्हीं की वजह से पार्टी की ये दुर्गति हो रही है। सिब्बल जी की बात का सबने एकमत से समर्थन किया और फ़ैसला हो गया कि ऐसे सारे नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधि के आरोप में पार्टी से हटा दिया जाये।”

“इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद पार्टी में राहुल जी को हटाने की मांग करने वाला कोई नेता नहीं बचेगा और वो पूरी कंसन्ट्रेशन के साथ पार्टी को डुबोने उबारने पर ध्यान लगा सकेंगे।” -यह कहकर वो मेकमाईट्रिप पर गोवा के टिकट बुक करने लगे। बुकिंग के बाद उन्होंने कहा कि “जैसे ही राहुल जी छुट्टियों से वापस आ जायेंगे, उन्हें इस निर्णय की सूचना दे दी जाएगी ताकि वे भी खुश हो सकें।”

वहीं, कांग्रेस के कुछ नेता इस निर्णय से नाराज भी नज़र आए। उनका कहना था कि जब तक राहुल जी भाजपा के हित में काम करते रहेंगे तब तक हम चुनाव हारते रहेंगे। लेकिन ऐसा मानने वाले नेताओं को चिंतन शिविर से ही धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया।



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