Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

कांग्रेस की 'लोकतंत्र बचाओ रैली' में भगदड़ मची, भीड़ में कुचले जाने से लोकतंत्र की दर्दनाक मौत

06, May 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. देश में लोकतंत्र को बचाने के लिये कई सालों से संघर्ष कर रही कांग्रेस पार्टी ने आज एक बार फिर उसे बचाने की कोशिश की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ख़बर मिली थी कि लोकतंत्र काफ़ी समय से जंतर-मंतर पर एक टेंट में रह रहा है और उसकी हालत काफ़ी गंभीर है।

“हटो, मूजे लोकतंथ्रा बाचाने से माथ रोको”

ख़बर मिलते ही सोनिया और राहुल समेत कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जंतर-मंतर पहुंच गये। पहुंचते ही उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिये भाषण दिये और फिर उसे साथ लेकर संसद भवन की ओर कूच कर दिया। उनके पीछे-पीछे उत्साही कार्यकर्ताओं की भीड़ भी दौड़ पड़ी।

तबियत ख़राब होने की वजह से लोकतंत्र भीड़ के साथ नहीं चल पाया और नीचे गिर पड़ा। सोनिया और राहुल के नज़दीक पहुंचने की होड़ में लगे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को नीचे गिरा लोकतंत्र दिखायी नहीं दिया और वे उसके ऊपर पैर रख-रखकर भागते रहे।

इस चक्कर में राहुल जी की चप्पल भी पीछे छूट गयीं। जब कुछ समर्पित कार्यकर्ता उन्हें उठाने के लिये नीचे झुके तो उनकी नज़र नीचे पड़े लोकतंत्र पर पड़ी। उन्होंने तुरंत उसे उठाकर हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है।

अफ़वाह है कि लोकतंत्र की मौत तो हॉस्पिटल लाने से पहले ही हो चुकी थी, वो तो ये हॉस्पिटल वाले अपना बिल बनाने के चक्कर में फालतू में ही उसे वेंटीलेटर पे रखे हुए हैं।

बीजेपी का आरोप है कि “कांग्रेस के नेताओं ने रैली में कुचलकर लोकतंत्र की हत्या कर दी।” कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि “हमारी रैली में बीजेपी के लोग घुस गये थे और लोकतंत्र उन्हीं के पैरों से कुचला गया है। सोनिया जी और राहुल जी तो उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे।”

जब एक पत्रकार ने पूछा कि “अगर आपकी रैली में बीजेपी के लोग घुस गये थे तो आपने उन्हें पहचाना क्यों नहीं?” इस पर उन्होंने कहा- “पहचानते कैसे? वे भी तो दिखने में बिल्कुल हमारे जैसे हैं।”

उधर, जैसे ही सोनिया और राहुल ने इस घटना की ज़िम्मेदारी लेते हुए संसद मार्ग थाने में गिरफ़्तारी दी, तो कार्यकर्ताओं ने समझा कि उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में सरेंडर कर दिया है। वे सब रोने लगे और एक-दूसरे को धक्का देते हुए चिल्लाने लगे- “अगस्ता घोटाला मैंने किया, राहुल भैय्या बेकसूर हैं!”, “अगस्ता की घूस मैंने खायी, मैडम जी निर्दोष हैं!”



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