Wednesday, 13th December, 2017

चलते चलते

भगत सिंह की फांसी अब भी याद है, दिल्ली के बुज़ुर्ग कॉमरेड की याद्दाश्त का दुनिया ने लोहा माना

31, Aug 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. लुटियन ज़ोन के ज़ोर बाग़ इलाक़े में रहने वाले एक पुराने कॉमरेड की याद्दाश्त का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। क्रांति प्रसाद संभव नाम के ये कम्युनिस्ट उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां लोग अपने बाल-बच्चों के नाम तक भूल जाते हैं। लेकिन उन्हें भगत सिंह द्वारा मिट्टी में बंदूक बोने से लेकर फांसी चढ़ने तक के सारे क़िस्से उन्हें मुंह-ज़बानी याद हैं।

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भगत सिंह के क़िस्से को याद करते क्रांति प्रसाद संभव

‘भगत सिंह 23 साल की उम्र में फांसी के फंदे पर झूल गया था’ –ये बात उन्हें आज 83 साल की उम्र में भी अच्छी तरह याद है। ऐसी बातों को बताते हुए उनकी आंखें आज भी चमक उठती हैं। उन्होंने देश-विदेश के अनेक संभ्रांत और महंगे कॉलेजों में पठन-पाठन किया लेकिन उससे उनकी सोच पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा।

संभव जी जीवन भर महंगे घरों में रहे, लंबी-लंबी गाड़ियों में चले, महंगे रेस्तराओं में खाना खाया लेकिन फिर भी कभी सुविधाओं के ग़ुलाम नहीं हुए। सारे ऐशो-आराम के बीच भी वो ऐसे रहे जैसे कीचड़ में कमल खिला रहता है। कमल की तरह उन्होंने भी अपने विचारों को गंदगी से बचाये रखा। अपनी विचारधारा से ख़ुद को जोड़े रखने के लिये वो बीड़ी या सिगरेट के बजाय सिगार पीते हैं, हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि ऐसा वो फ़िदेल कास्त्रो के सम्मान में करते हैं।

अर्बन लैडर से खरीदे इटेलियन सोफ़े पर बैठे संभव जी ने बताया कि “इतने सारे प्रलोभनों के बीच अपनी विचारधारा को बचाये रखना आसान नहीं होता। लेकिन अगर आप ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है।”

“भगत सिंह ने शादी भी नहीं की थी, जब घरवालों ने ज़ोर डाला तो कह दिया कि आज़ादी ही मेरी दुल्हन है।”- अपने पोते को पुचकारते हुए संभव बोले और फिर पुराने दिनों की यादों में खो गये।



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