Sunday, 17th December, 2017

चलते चलते

अब आज़म ख़ाँ की भैंसों ने भी की मुलायम से बग़ावत, अखिलेश गुट में हुईं शामिल

02, Jan 2017 By Ritesh Sinha

लखनऊ. समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान का सबसे बुरा असर आज़म खाँ की पर्सनल भैंसों पर पड़ रहा है। न्यूज़ चैनल वाले दिन भर बाप-बेटे का झगड़ा दिखा रहे हैं, लेकिन इन निरीह जानवरों पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। लखनऊ के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक पशुपति चौरसिया जी ने बताया कि “इन भैंसों के दिमाग पर यादव परिवार के झगड़े का बहुत बुरा असर पड़ रहा है और उन्हें माईग्रेन होने की संभावना 90% तक बढ़ गई है।”

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फ़ेकिंग न्यूज़ से बात करती अखिलेश गुट में शामिल हुई भैंस

इसी रोज़-रोज की किच-किच से तंग आकर आज़म ख़ाँ साब की आधी भैंसें कल रात तबेले से भाग गईं। आज़म ने ‘उत्ता पदेश’ की सारी पुलिस अपनी भैंसों की खोज में दौड़ा दी लेकिन अभी तक एक भी भैंस का पता नहीं चल पाया है। दावा किया जा रहा है कि उनकी भैंसों ने अपना पाला बदल लिया है और वे अखिलेश गुट में शामिल हो गयी हैं। शक है कि अखिलेश के समर्थकों ने इन भैंसों को किसी फ़ाइव स्टार होटल में या फॉर्म हाउस में ठहराया हुआ है।

इन लापता भैंसों में से एक नेता टाइप भैंस ने गुमनाम जगह से फेकिंग न्यूज़ को फोन करके अपने भागने का कारण बताया कि- “यादव परिवार में दो महीने से झगड़ा चल रहा है लेकिन हमारे मालिक ने अब तक भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। मीडिया में भी ऐसे घुमा-फिराकर बयान देते हैं कि हम भी कन्फूजिया जाती हैं कि ये नेताजी के साथ हैं कि ‘अखलेश भैय्या’ के साथ हैं। इसीलिए हम तबेले से भाग आयीं और हमने अखिलेश गुट में शामिल होने का निर्णय ले लिया।” -उनके इस बयान का सभी भैंसों ने एक सुर में रंभाते हुए समर्थन किया।

साथ ही इन भैसों ने एक स्वर में उन ख़बरों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि इन भैंसों को अखिलेश गुट में शामिल होने के लिए मंत्री पद का लालच दिया गया है। भैंसों ने स्पष्ट किया कि वे अखिलेश गुट में निःस्वार्थ भाव से शामिल हो रही हैं।

उधर, आज़म ने अपनी भैंसों से लौटकर वापस तबेले में आने की अपील की है, लेकिन भैंसों पर उनकी इस अपील का कोई असर दिखायी नहीं दे रहा है। इस बीच, यादव परिवार का ड्रामा लगातार जारी है। ख़बर लिखे जाने तक रामगोपाल दस बार, अखिलेश बीस बार और खुद मुलायम सिंह चार बार पार्टी से बाहर हो चुके थे।



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