Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

अमित शाह पर विपक्ष को दिल्ली में उलझा कर चुपके से चुनाव प्रचार करने का आरोप

25, May 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. विपक्ष को सेना, GST, पाकिस्तान, ट्विटर और तीन तलाक पर उलझाकर आजकल अमित शाह चुपचाप अपनी पार्टी का चुपके से प्रचार कर रहे हैं। वे उन राज्यों की यात्रा पर हैं जहाँ भाजपा कमजोर है, और घूम-घूमकर पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि इसमें कोई गलती नहीं है, लेकिन कांग्रेस पार्टी का कहना है कि- “हमें बताए बिना ही अमित शाह का प्रचार पर निकल जाना, ये दिखाता है कि वे किसी की भावनाओं का जरा भी आदर नहीं करते हैं। एक नोटिस तक नहीं दिया हमें। उन्हें सूचना देकर ही प्रचार पर निकलना चाहिए था। ताकि हम भी कुछ तैयारी कर सकें।”

गरजते हुए अमित शाह
गरजते हुए अमित शाह

गौरतलब है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष 95 दिन की विस्तार यात्रा पर निकल पड़े हैं। इस अभियान की शुरुआत उन्होंने पश्चिम बंगाल से की थी। वहां वे इतने जोश में थे कि प्रचार करते-करते बांग्लादेश में घुस गए थे। सीमा से लगे चार-पांच गाँव में तो उन्होंने जनसभा भी कर दिया था। जब उन्हें किसी ने बताया कि ये लोग बांग्लादेश के निवासी हैं, तब जाकर वे वापस भारत की सीमा में वापस आए थे।

अमित शाह का इस तरह प्रचार करना कांग्रेस पार्टी को जरा भी पसंद नहीं आ रहा है। कांग्रेस के प्रवक्ता आर.एस. सुरजेवाला ने बताया कि “ये सरासर अन्याय है, भाजपा हमेशा से हमारी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे, हम भी अपनी पार्टी के प्रचार में निकलेंगे। बस, हम राहुल जी के इशारे का इंतज़ार कर रहे हैं, जैसे ही वो हमें हरी झंडी दिखा देंगे, हम भी पार्टी को मजबूत करने निकल पड़ेंगे।” “कितने दिन लग जाएँगे राहुल गाँधी को इशारा करने में? ऐसा पूछे जाने पर सुरजेवाला ने अपनी पार्टी का चिन्ह दिखाते हुए कहा कि – ‘पांच महीने!’

“हम यहाँ दिल्ली में बैठकर पाकिस्तान पर, तीन तलाक पर, EVM पर बयान दे रहे हैं, और ये जनाब हमें यहाँ उलझाकर खुद तेलंगाना निकल गया है। मुझे तो कभी-कभी शक होता है कि ये सभी मुद्दे हमें इंगेज करने के लिए तो नहीं उछाले गए हैं।” -सुरजेवाला ने ऑफ-कैमरा अपना दुखड़ा सुनाया।

उधर, अमित शाह ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि “मैं चुपके से नहीं निकला हूँ, सब कुछ दिन के उजाले में हो रहा है। राहुल बाबा को किसने रोका है? वे भी कर लें चुपके से प्रचार!”-कहते हुए वे एक जनसभा को संबोधित करने रवाना हो गए।



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