Friday, 20th January, 2017
चलते चलते

सभी दलों ने अपने नेताओं को विवादित बयान देने से रोका, ओलंपिक की वजह से नहीं मिल रहा मीडिया कवरेज

13, Aug 2016 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. सभी राजनीतिक दलों ने ओलंपिक की लोकप्रियता को देखते हुए अपने नेताओं को विवादित बयान देने पर रोक लगा दी है। पार्टियों का मानना है कि अगर इस टाइम कोई नेता विवादित बयान देगा भी तो उसे ज्यादा कवरेज नहीं मिलेगी। इसलिए ओलंपिक ख़त्म होने तक चुप रहने में ही भलाई है। सारी पार्टियों इस पर एकमत हैं।

इसे उत्तर प्रदेश चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जैसे वर्ल्ड कप से पहले सचिन को आराम दिया जाता था ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बयान बहादुरों को आराम दिया जा रहा है।

BJP
“बस 10-15 दिन की ही तो बात है”

एक बड़ी पार्टी के अध्यक्ष ने फेकिंग न्यूज़ को बताया कि “देखिए! हम तो ख़ुद समय समय पर अपने नेताओं को बयान देने के तरीके बताते रहते हैं लेकिन जब से ओलंपिक शुरू हुआ है तब से सब गड़बड़ हो गया है। बची खुची कसर संसद के मानसून सत्र ने पूरी कर दी। मीडिया वालों के पास हमारे उन नेताओं के लिए समय ही। इसलिए हमने उन्हें कुछ दिन तक उल्टा सीधा बोलने से बैन कर दिया है।”

एक और पार्टी के अध्यक्ष ने बताया कि “जब तक किसी बयान पर जमकर तू-तू मैं-मैं ना हो तब तक मज़ा नहीं आता है, और हमारी पार्टी के विभिन्न नेताओं ने तो एक से बढ़कर एक विवादित बयान दिए हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हमने इस पर बैन लगा दिया है, वो ओलंपिक चल रहा है ना इसलिए! जैसे ही ओलंपिक ख़तम होगा हम बैन हटा लेंगे फिर सभी नेता धड़ल्ले से जैसा चाहें बयान दे सकते हैं। और फिर कुछ दिन बाद यूपी के चुनाव भी तो आने वाले हैं, तब तो रोज़ दस-दस विवादित बयान देने पड़ेंगे।”

उधर, विवादित बयान देकर ही अपना घर चलाने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और एक्टिविस्ट भी बयान देने से बच रहे हैं। उन्हें भी ओलंपिक के ख़त्म होने का बेसब्री से इंतज़ार है।



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