Friday, 18th August, 2017

चलते चलते

अखिलेश को मिला साइकिल की 'घंटी' चुनाव चिन्ह, वो बोले- इससे तो अच्छा था 'घंटा' दे देते

03, Jan 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली/लखनऊ. चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच ‘साइकिल’ को लेकर चल रहे झगड़े का निपटारा कर दिया है। आयोग ने कल मुलायम का पक्ष सुना था और आज अखिलेश का। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आयोग ने अखिलेश को साइकिल की ‘घंटी’ चुनाव चिन्ह देने का फ़ैसला किया है, जबकि बिना घंटी की साइकिल मुलायम सिंह को दे दी गयी है।

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इसी साइकिल की घंटी मिली है अखिलेश को

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी ने इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए कहा कि “दोनों बाप-बेटे साइकिल को अपनी-अपनी बता रहे थे। बाप कह रहा था कि इसे मैं लेकर आया था, जबकि बेटे का कहना था कि कई सालों से इसे मैं ही चला रहा हूं, इसलिये ये मेरी है।” यह सुनकर एक पत्रकार ने पूछा कि “इससे तो अच्छा था कि आप पूरी की पूरी साइकिल ही अखिलेश को दे देते, इस बुढ़ापे में मुलायम अब कहां साइकिल पे चढ़ेंगे!”, इस पर ज़ैदी बोले- “पूरी साइकिल कैसे दे देते! अगर कल को नेताजी के दूसरे बेटे और पत्नी ने भी साइकिल पर दावा जता दिया तो? तो उन्हें भी तो कुछ ना कुछ हिस्सा देना पड़ेगा ना!”

फिर अपने फ़ैसले को जायज़ ठहराते हुए ज़ैदी आगे बोले- “वैसे, घंटी देने से पहले हमने अखिलेश को पैडल, कैरियर और चेन देने पर भी विचार किया था लेकिन साइकिल से अलग होकर ये पार्ट किसी काम के नहीं! घंटी कम से कम बजेगी तो सही!” आयोग की इस दलील के बावजूद अखिलेश इस फ़ैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि “इससे तो अच्छा था कि चुनाव आयोग मुझे ‘घंटा’ दे देता। वो आवाज़ भी घंटी से ज़्यादा करता और देखने में भी अच्छा भी लगता!”

उधर, मुलायम भी चुनाव आयोग के इस बंटवारे से नाराज़ बताये जा रहे हैं। उनका कहना है कि “बिना घंटी की साइकिल का हंवै क्या फ़ायदा! अब तो सड़क पै जा रहा हाथी भी हंवायी साइकिल के सामने से नहीं हटेगा!”



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