Thursday, 14th December, 2017

चलते चलते

गुजरात में चुनाव प्रचार करने निकल पड़े थे आडवाणी, गार्ड्स ने बड़ी मुश्किल से रोका

25, Nov 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. गुजरात में चुनाव प्रचार करने का शौक आजकल हर नेता ने पाल रखा है, ऐसे में भाजपा का मार्गदर्शक मंडल कैसे पीछे रह सकता है? कल की ही बात है, आडवाणी जी सुबह उठते ही गुजरात जाने की जिद करने लगे। नहा धोकर वे प्रचार के लिए निकल ही पड़े थे, ये तो भला हो उन जांबाज़ सुरक्षा अधिकारियों का जिन्होंने उन्हें जाने से रोक लिया, वरना कुछ भी हो सकता था।

सपना देखते अडवाणी
सपना देखते अडवाणी

उन्हें चुनावी सभा में भाषण देने का इतना शौक है कि वे “मेरा गुजरात, मेरा गुजरात” कहते हुए नींद से जागे थे। उठते ही उन्होंने अपने पीए जुगलकिशोर शास्त्री से कहा- “सुनो जुगल! गुजरात जाने का प्रबंध करो! वहां चुनाव का शंखनाद हो चुका है! बहुत दिन से किसी चुनावी सभा को संबोधित भी नहीं किया! चलो चलते हैं!” इतना सुनते ही उनके पीए के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने आडवाणी जी को समझाने की कोशिश की- “नहीं सर! आप अपनी सेहत का ख्याल रखिए! ये चुनाव के झंझट आप शाह और मोदीजी पर छोड़ दीजिए! वे संभाल लेंगे!”

“तुम्हें जितना कहा जाए उतना करो! भाषण मत दो! भाषण तो मैं दूंगा आज गांधीनगर में!”-आडवाणी जी ने आँखें तरेरते हुए कहा और वे गरम पानी से नहाने बाथरूम में घुस गए। थोड़ी ही देर में नहा-धोकर तैयार भी हो गए। इधर, उनके पीए जुगलकिशोर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इनकी जिद का क्या किया जाए? उन्होंने अमित शाह को फोन लगाया- “सर! आडवाणी जी, गुजरात मोड में चले गए हैं, क्या करूँ?” तो उधर से आवाज आई- “देखो! घर से निकलने मत देना उन्हें! बांधकर रखो! वरना तुम्हारी खैर नहीं!”

जुगलकिशोर, पार्टी अध्यक्ष से डांट खा ही रहे थे कि इतने में आडवाणी जी वहाँ सज-धजकर आ गए। “कहाँ है मेरा रथ? जल्दी लाओ!’-उन्होंने अपने पीए से कहा। पीए ने ‘जी सर, जी सर’ कहते हुए फोन रक्खा और तुरंत एक्शन में आ गए।

वे आडवाणी जी के पास आए और बोले- “देखिए! आप ज्यादा टेंशन मत लीजिए, रथ पे चढ़ने की उम्र नहीं रही आपकी! शाह जी का आदेश है कि आपको घर से निकलने ना दिया जाए, इसलिए आप चुपचाप यहाँ बैठकर टीवी देखिए!”-कहते हुए उन्होंने गार्ड्स से खिड़की दरवाजे बंद करने के लिए कह दिया। आडवाणी जी को बहुत गुस्सा आया, लेकिन वे कर भी क्या सकते थे, वे मन मारकर, आहिस्ते अपनी कुर्सी पर बैठ गए। “ये अमित शाह मेरी बिल्कुल भी चलने नहीं देता!”-आडवाणी जी ने सिर्फ इतना कहा और ऊँगली मुंह के पास रखकर कुछ सोचने लगे।

उधर, कई लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव सबसे “बोरिंग” चुनाव बन गया है, कुछ मज़ा ही नहीं आ रहा। सीडी और पीडी मिलकर भी उत्तर प्रदेश और बिहार चुनाव की बराबरी नहीं कर पा रहे हैं। अब तो जैसे-तैसे ये चुनाव ख़त्म हो जाएं, यही अच्छा है।



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