Saturday, 24th June, 2017
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7, RCR का नाम बदलने पर निराश हुए आडवाणी, कहा- बुढ़ापे में नया नाम रटना मुश्किल होगा

22, Sep 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का पता 7, रेसकोर्स रोड से बदलकर ‘7, लोक कल्याण मार्ग’ होने वाला है। इससे बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के सबसे वरिष्ठ सदस्य लालकृष्ण आडवाणी बेहद नाराज़ बताये जा रहे हैं। मार्गदर्शक मंडल के उनके एक अभिन्न साथी के मुताबिक इस फ़ैसले से 7, आरसीआर में जाने की आडवाणी जी की बची-खुची उम्मीद भी ख़त्म हो गयी है।

Advani
7 आरसीआर का नाम बदलने पर भावुक होते आडवाणी जी

बताया जा रहा है कि यह सब प्रधानमंत्री मोदी के कहने पर किया गया है। मीनाक्षी लेखी ने ‘रेसकोर्स रोड’ का नाम बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ रखने का सुझाव उनके कहने पर ही दिया था। क्योंकि जैसे वो कांग्रेस को पूरी तरह ख़त्म करने के मिशन पर लगे हुए हैं, वैसे ही वो आडवाणी जी के पीएम बनने का भी कोई चांस नहीं छोड़ना चाहते।

पीएमओ के एक सूत्र ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि “वैसे तो आडवाणी जी अब मोदी जी रास्ते में रोड़ा नहीं अटका सकते लेकिन इंडियन पॉलिटिक्स का कुछ पता नहीं, कब क्या हो जाये! इसलिये मोदी जी ने सोचा कि चांस लेना ठीक नहीं है। अगर 2024 तक इस घर में रहना है तो इसका नाम बदलना होगा।”

सूत्र ने इस डर की वजह बताते हुए कहा कि “कुछ दिन पहले आडवाणी जी की प्रार्थना से ख़ुश होकर भगवान ने पूछा था कि ‘मांगो, क्या वरदान मांगना चाहते हो?’, तो आडवाणी जी ने कहा कि ‘प्रभु एक बार 7, RCR में रहना चाहता हूं’। भगवान ने कहा “तथास्तु” और ग़ायब हो गये।”

“लेकिन अब तो भगवान भी आडवाणी जी इस इच्छा को पूरा नहीं कर सकते क्योंकि दिल्ली में अब 7, रेसकोर्स रोड नाम की कोई जगह ही नहीं बची।” -उन्होंने आंख मारते हुए कहा। “और जब इस नाम का एड्रेस ही नहीं मिलेगा तो भगवान अडवाणी जी को भेजेंगे कहां!” -कहकर सूत्र ज़ोर से हंस पड़े।

उधर, मोदी जी ने ऐसी तमाम अटकलों को ख़ारिज़ करते हुए कहा है कि “मैंने तो ये नया नाम अडवाणी जी को ही समर्पित किया है। ‘लोक कल्याण मार्ग’ यानि ‘एल के मार्ग’ और ‘एल के’ माने ‘लालकृष्ण’! तो अब मैं जब भी ‘एलके मार्ग’ बोलूंगा तो समझो अडवाणी जी को ही याद कर रहा हूं। ये मेरी ओर से उन्हें छोटी सी गुरु-दक्षिणा है।”

पता चला है कि इस नाम-परिवर्तन से मुलायम सिंह यादव समेत कई और बुज़ुर्ग नेताओं को भी गहरा धक्का पहुंचा है क्योंकि बुढ़ापे की वजह से उनकी याद्दाश्त कमज़ोर हो चुकी है और उनके लिये प्रधानमंत्री आवास का नया नाम याद करना बेहद मुश्किल होगा। लेकिन कांग्रेस इस बदलाव से बिल्कुल भी परेशान नहीं है। पार्टी के 45 साल के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि “हमारे राहुल जी अभी काफ़ी युवा हैं और वो किसी भी नये नाम को आसानी से याद रख सकते हैं।”



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