Sunday, 24th September, 2017

चलते चलते

मनगढंत खबरे छापने की हुई प्रतियोगिता, कई बड़े अख़बारों ने फ़ेकिंग न्यूज़ को पछाड़ा

23, Aug 2016 By Pagla Ghoda

मुंबई. मनगढंत खबरें छापने के लिए हुई प्रतियोगिता “India’s got imagination” में फेकिंग न्यूज़ को तब मुँह की खानी पड़ी, जब देश के दो बड़े अखबार “द राइम्स ऑफ़ इंडिया” और “द बिंदु” ने फ़ेकिंग न्यूज़ को एक बड़े मार्जिन से पछाड़ दिया। फ़ेकिंग न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार श्री पागल पत्रकार ने हालाँकि इस मामले में कोई भी टिपण्णी करने से इनकार कर दिया है पर युवा धुरंधर पत्रकार बगुला भगत और बैंडिट क़्वीन ने दबे शब्दों में स्वीकार किया है कि कई बड़े अखबार काफी पहले से मनगढंत खबरें छापते आ रहे हैं, जो कि मनगढंत-ता और काल्पनिकता के मामले में फ़ेकिंग न्यूज़ से मीलों आगे हैं।

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बस आने ही वाला है… एक्स्ट्रा बदलाव!

मैंगो शेक सिप करते हुए बगुला भगत ने बताया, “अगर आप इतिहास उठाकर देखेंगे तो पाएंगे कि फ़ेकिंग न्यूज़ की शुरुआत सन 2008 में हुई है, परंतु ये सत्य नहीं है। कई बड़े अखबार सन् पचास के दशक से ही फ़ेक न्यूज़ छापते आ रहे हैं, बस वे ख़ुद को फ़ेकिंग न्यूज़ कहते नहीं। टेररिस्ट मरता है तो कहते हैं कि शहीद हो गया और जवान मरता है तो कहते हैं कि ‘घाटी में तनाव!’ गोलगप्पे वाला ग्राहक को सूखी पूड़ी ना दे तो कहते हैं माइनॉरिटी ग्राहकों के साथ कम्युनल गोलगप्पे वाले कर रहे हैं पक्षपात। एक छोटा बच्चा दूसरे बच्चे की लॉलीपॉप भी छीन ले तो उसमें भी नयी काल्पनिक कथा गढ़कर उसे धार्मिक रंग देने में इन अखबारों और न्यूज़ चैनलों को देर नहीं लगती।

बैंडिट क़्वीन ने भी बगुला की बातों का समर्थन करते हुए कहा, “ये सब ओपी इंडिया नामक वेबसाइट की गलती है कि उन्होंने इस बात को खुलके उजागर कर दिया है कि दरअसल कई अखबार और मीडिया चैनल भी बहुत समय से फेकिंग न्यूज़ छाप रहे हैं, एवं दिखा रहे हैं। अब हमारे पाठक हर अखबार को फेकिंग न्यूज़ से कंपेयर करने लगे हैं। ऐसे में कम्पटीशन बहुत बढ़ गया है भाई।”

केजरीवाल के फैन पागल घोडा नमक पत्रकार से जब इस बाबत सवाल किये गए तो पहले तो वो काफी ज़ोर से हिनहिनाये, फिर अपनी भारी आवाज़ में बोले, “दुःख की बात तो ये है कि इस प्रतियोगिता में देश के बड़े अखबारों के साथ साथ केजरीवाल जी और आशु भाई के ट्विटर अकाउंट्स को भी हिस्सा लेना चाहिए था। चूँकि उनके जैसी काल्पनिक एवं फ़ेकिंग न्यूज़ विरले ही लिख पाते हैं, इसलिए उनका जीतना अवश्यम्भावी था। दिल्ली में हो रहे चमत्कारों के बारे में जिस प्रकार केजरीवालजी ट्वीट करते हैं उसे पढ़कर तो दिल्लीवाले तक भ्रमित हो जाते हैं कि अगर धरा पर कहीं स्वर्ग है तो वो दिल्ली में ही है। और आशु भाई, जो कि इंटरनेशनल स्पेलिंग बी कम्पटीशन के चैंपियन भी रह चुके हैं, के ट्वीट भी पाठकों को एक अलग काल्पनिक आयाम में ही ले जाते हैं।”

पत्रकार समीर ने इस मामले में अंतिम टिप्पणी देते हुए कहा, “जब इतने बड़े बड़े अखबार और न्यूज़ चैनल मनगढंत और काल्पनिक कहानियां लिखने में पीछे नहीं हट रहे तो ये हम लोगों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत ही है कि हम उनसे भी ऊंची कल्पना की उड़ान भरें, और फिर देखिएगा अगले साल का “India’s got imagination” पुरस्कार हम ही जीतेंगे।



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