Sunday, 26th March, 2017
चलते चलते

"आप की अदालत" को हाईकोर्ट का दर्जा मिला, रजत शर्मा प्रमोट होकर वकील से जज बने

31, Jul 2014 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. इंडिया टीवी की ‘आप की अदालत’ को अब सचमुच की अदालत का दर्जा मिल गया है। क़ानून मंत्रालय ने आज ‘आप की अदालत’ को हाईकोर्ट के बराबर का दर्जा प्रदान कर दिया। इस अदालत में सालों से वकालत कर रहे तेज़-तर्रार वकील रजत शर्मा को भी प्रमोट करके जज बना दिया गया है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रजत शर्मा को जज का सर्टिफिकेट प्रदान किया। इस अवसर पर श्री मोदी ने अपने अनुभव याद करते हुए कहा कि, “शर्मा जी को पता था कि मैं पीएम बनने वाला हूं, फिर भी वो माने नहीं और मुझ पर बहुत गंभीर मुकदमा चलाया।” उन्होंने आगे कहा कि, “सच कहूं तो, ना मैं वहां गया था, ना किसी ने मुझे वहां भेजा था, मुझे तो शर्मा जी ने बुलाया था!”

Rajat Sharma
होनहार वकील

इस कार्यक्रम के बाद सरकार के फ़ैसले की विस्तार से जानकारी देते हुए क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि, “हमने आज अपना एक और चुनावी वादा पूरा कर दिया। हालांकि इस वादे का ज़िक्र हमारे घोषणा-पत्र में नहीं था। लेकिन वादा तो वादा होता है!” कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि, “यूपीए सरकार ने तो मद्रास हाईकोर्ट में एक अयोग्य जज का प्रमोशन किया था, जबकि हमने देश के सबसे काबिल बंदे को जज बनाया है।”

श्री प्रसाद ने शर्मा जी की प्रशंसा करते हुए कहा कि, “इनके टेलेंट का पता इसी बात से लग जाता है कि आज तक किसी दूसरे वकील की इनके सामने आने की हिम्मत भी नहीं हुई। वहां तो जज भी तभी मुंह खोलते हैं, जब शर्मा जी इशारा करते हैं।”

इस फ़ैसले से बेहद खुश नज़र आ रहे इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा ने कहा कि, “न्यूज़ चैनल खोलना तो बस एक बहाना था। असल में मैं बचपन से ही जज बनना चाहता था और लोगों की किस्मत का फ़ैसला करना चाहता था। आज से मेरे और भी अच्छे दिन शुरु हो गये हैं!”

उधर, सरकार के इस फ़ैसले पर क़ानून के जानकार दो धड़ों में बंट गये हैं। संविधान विशेषज्ञ फली एस नशेमन का कहना है कि “टीवी के प्रोग्राम्स को इतना सीरियसली नहीं लेना चाहिए। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो ‘एसीपी अर्जुन’ भी किसी दिन पुलिस कमिश्नर बन जायेगा।”

आम आदमी पार्टी ने भी ‘आप की अदालत’ पर अपना हक़ जताते हुए इंडिया टीवी के बाहर धरना दे दिया है। पार्टी के प्रवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि, “नाम से ही पता चल रहा है कि ये हमारी अदालत है।”



ऐसी अन्य ख़बरें