Wednesday, 22nd February, 2017
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युवक का बैंक PO के लिये हुआ सलेक्शन, घरवाले दुविधा में कि खुशी मनायें या ग़म

15, Nov 2016 By Ritesh Sinha

भोपाल. सुभाष नगर में रहने वाला एक युवक संजय चावला बैंक पीओ की नौकरी के लिए तीन साल से मेहनत कर रहा था। संजय सुबह-शाम कोचिंग जाता और कोचिंग से आकर भी सीधे घर में पढने बैठ जाता था। संजय की ये मेहनत आख़िरकार रंग लाई और कुछ दिन पहले उसे एक बैंक में PO की नौकरी मिल गई। लेकिन इस खुशखबरी के बावजूद संजय के मम्मी-पापा ये डिसाइड नहीं कर पा रहे कि बेटे की नौकरी लगने पर खुश हों या मातम मनायें!

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बैंक पीओ से हाथापाई करते नोट बदलवाने वाले लोग

उनकी टेंशन की वजह है बैंकों के बाहर लगी लंबी-लंबी कतारें। चूंकि पुराने नोट बदलवाने के लिये आजकल बैंकों में भारी भीड़ उमड़ रही है और इस वजह से बैंक कर्मचारियों का भी बुरा हाल है। उन्हें दस से बारह घंटे लगातार काम करना पड़ रहा है। कुछ कर्मचारियों को तो अपने बच्चों का मुंह देखे भी कई-कई दिन हो गये हैं। कुछ जगहों से कर्मचारियों के साथ हाथापाई की भी ख़बरें आ रही हैं।

फेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए मनोहर चावला (संजय के पिताजी) ने बताया कि- “शुरू में तो मैं भी खुश हुआ था कि चलो बेटे को नौकरी मिल गई, लेकिन जब से 500 और 1000 का नोट बंद हुआ है, इस बैंक की नौकरी से मुझे नफरत हो गयी है। दस-दस घंटे जान मराओ और फिर पब्लिक की गालियां भी खाओ! इससे तो अच्छा था कि हमारा संजडू (संजय का घर का नाम) सड़क किनारे गन्ने के जूस का ठेला लगा लेता!”

उधर ख़ुफ़िया सूत्रों से पता चला है कि नौकरी लगने की बाद भी संजय ने अपने मोहल्ले में अब तक मिठाई नहीं बांटी है। दरअसल मिठाई लेने के लिए उसके पास पैसे ही नहीं है। वो पिछले तीन दिनों से ATM की लाइन में लगकर पैसा निकालने की कोशिश कर रहा है, फिर भी उसे सफलता हाथ नहीं लगी है। दूसरे, उसे यह डर भी सता रहा है कि अगर अड़ोसी-पड़ोसियों को उसके बैंक में जॉब लगने का पता चल गया तो कहीं वे उसे बदलने के लिये अपने पुराने नोट ना थमाने लग जायें।



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