Sunday, 22nd April, 2018

चलते चलते

ग़लती से ताऊ खचेड़ू हुड्डा की मूर्ति तोड़ बैठे उपद्रवी, पड़ गये लेने के देने

09, Apr 2018 By बगुला भगत

गुरुग्राम. आजकल देश में मूर्तियाँ तोड़ने का फ़ैशन चल रिया है। इसी चक्कर में आज मुँह अंधेरे कुछ लोगों ने ग़लती से ताऊ खचेड़ू हुड्डा की मूर्ति तोड़ दी, जिसके बाद ताऊ के पोतों और उनके संगी-साथियों ने उन तोड़ने वालों की जमकर सुताई कर दी। इतना ही नहीं, उन्हीं से सीमेंट और गारा मँगवाया और ताऊ का टूटा हुआ सर वापस उन्हीं से जुड़वाया।

Statue Vandalism
उपद्रवियों द्वारा तोड़ा गया एक स्टेच्यू

हुआ यूँ कि कुछ गुंडे और आवारगर्द जगह-जगह मूर्ति तोड़ने की ख़बरों से ख़ार खाये बैठे थे। उन्हें ख़ुद पे लानत आ रही थी कि उन्होंने अभी तक किसी की मूर्ति क्यों नहीं तोड़ी! वे इस बात से भयंकर आक्रोशित थे (वैसे भी आक्रोशित होने की भारत में कोई एक वजह थोड़े होती है!)

तो जी, भाई लोग सुबह सवेरे निकल लिए मूर्ति तोड़ने! थोड़ी दूर चलने पे ‘खचेड़ू चौक’ आ गया, जहाँ ताऊ खचेड़ू हुड्डा की मूर्ति लगी हुई थी। एक तो मूर्तियाँ बनाने वाले ऐसे पहुँचे हुए कलाकार होते हैं कि सारी मूर्तियाँ एक जैसी लगती हैं। और ऊपर से ये तोड़-फोड़ करने वाले इतने पढ़े-लिखे होते नहीं कि ये पढ़ सकें कि मूर्ति पे किसका नाम लिखा है!

तो उन्होंने आव देखा ना ताव और मूर्ति के सर पे हाथ साफ़ करने लगे। लेकिन ये कोई अंबेडकर या गाँधी की मूर्ति तो थी नहीं कि तोड़ने के बाद कोई कुछ नहीं कहेगा। किसी ने ताऊ खचेड़ू के पोते राजबीर को ख़बर कर दी और वो अपने साथियों के साथ लाठी-डंडे लेकर आ धमका।

आते ही उन लोगों ने उपद्रवियों को लपेटना शुरु कर दिया। अच्छी तरह सुताई करने के बाद उनसे हाथ-पैर जुड़वाए, उट्ठक-बैठक करवाई। फिर उन्हीं से तसला, सीमेंट और गारा वगैरह मँगवाया और ताऊ का सर वापस जुड़वाया, तब कहीं जाकर उन्हें छोड़ा। लंगड़ाकर ‘हाय-हाय’ करते हुए भाई लोगों ने क़सम खायी कि आज के बाद किसी मूर्ति को तोड़ना तो दूर, उसकी तरफ़ आँख उठाकर भी नहीं देखेंगे!



ऐसी अन्य ख़बरें