Sunday, 22nd October, 2017

चलते चलते

अपनी नदियों को साफ़ करने के लिए इंग्लैंड और अमेरिका ने भी मांगी हमारी 'Rally For Rivers' तकनीक

25, Sep 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली/लंदन. भारत की विश्व-प्रसिद्ध ‘रैली तकनीक’ (Rally Technology) का लोहा अब पूरी दुनिया मान रही है। फिलहाल इस रैली तकनीक का इस्तेमाल करके हम अपने देश की नदियों को साफ़ कर रहे हैं। जहाँ-जहाँ से ये रैली निकलती जा रही है, वहाँ-वहाँ नदियाँ साफ़ होती जा रही हैं। इससे प्रभावित होकर इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देश भी अब हमसे इस तकनीक को मांग रहे हैं।

Rally For Rivers
रैली तकनीक का प्रदर्शन करते कुछ जाने-माने लोग

इसी सिलसिले में अमेरिका का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधमंडल भारत आया हुआ है, जिसने आज जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की। इस अवसर पर साधुगुरू जी भी मौजूद थे। दोनों ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को रैली तकनीक की विशेषताएं बताईं। गडकरी जी ने कहा कि “समस्या चाहे कितनी भी बड़ी हो, हम रैली निकालकर उसे चुटकियों में दूर कर देते हैं। इस तकनीक से हम अब तक अपने देश की गंदगी साफ़ कर चुके हैं, दहेज प्रथा ख़त्म कर चुके हैं, महिलाओं पर होने वाले अत्याचार ख़त्म कर चुके हैं, नशे की समस्या ख़त्म कर चुके हैं।”

“इसलिये हमारे देश में हर समय कोई ना कोई बाइक रैली निकल रही होती है और कोई ना कोई समस्या ख़त्म हो रही होती है!” -गुरुजी गर्व से बोले।

“क्या आप लोग इसके लिये कोई क़ानून वगैरह भी बनाते हैं, नदी को गंदा करने वालों को सज़ा-वज़ा भी देते हैं क्या?” एक प्रतिनिधि ने पूछा। “क़ानून-वानून की ज़रूरत हमें नहीं पड़ती! और ना किसी को सज़ा देने की! हम तो रैली निकालते हैं, रैली से जागरूकता फैलती है और फिर लोग जागरूक होकर समस्या को जड़ से मिटाने में जी-जान से जुट जाते हैं।” -गडकरी जी ने समोसा उठाते हुए कहा।

“और रैली को देखकर फ़ैक्ट्री मालिकों को भी पश्चाताप होने लगता है, वे तुरंत नदी में गिरने वाला अपनी फ़ैक्ट्री का नाला बंद कर देते हैं। सिंपल!” -साधगुरु बीच में बोले।

यह सुनकर अमेरिकियों के मुँह से निकला- “WOW!” “और नहीं तो क्या! छोटी-मोटी नदियों को तो हम आरती और हवन करके ही साफ़ कर देते हैं।” -गडकरी जी सीना पेट फुलाते हुए बोले। यह सुनकर एक अमेरिकी बोला- “तो रैली के लिये हमें क्या-क्या इंतज़ाम करना पड़ेगा?” “दस-पंद्रह हज़ार मोटरसाइकिलें, एक मेन ‘स्पॉन्सर’, कुछ ‘को-स्पॉन्सर्स’, दसेक ‘इवेंट पार्टनर्स’ और पंद्रह-बीस शहरों में भव्य इवेंट्स! और हाँ! एक सुंदर सा ‘टोल फ्री नंबर’, जिस पर लोग नदी को साफ़ करने के लिये वोट देंगे।” -गुरुजी ने मोबाइल में देखते हुए कहा।

“आप हैशटैग भूल रहे हैं गुरुजी!” -गडकरी जी ने याद दिलाया। “अरे हाँ! हैशटैग के बिना तो आजकल कुछ होता ही नहीं है। तो ‘#RallyForRivers’, ‘#StandWithRivers’ और #RivarWarriors जैसे दो-तीन फैंसी से हैशटैग भी लगेंगे।”

तो उस अमेरिकी ने हैरानी से पूछा- “क्या इससे नदी साफ़ हो जायेगी?” “हंड्रेड परसेंट! अगर कोई नदी ज़्यादा ज़िद्दी हो और आसानी से ना माने तो उसके साथ सेल्फ़ी (SelfieWithRiver) लेना शुरु कर देना। वो ख़ुद ही साफ़ होने में मदद करने लगेगी!” -गडकरी जी ने अगला समोसा उठाते हुए कहा।



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