Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

कुँआरे मुस्लिम युवाओं की सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी- "तलाक़ से पहले हमारी शादी तो कराओ"

23, Aug 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कल मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक़ की प्रथा को असंवैधानिक क़रार दे दिया, जिसका सभी धर्मों और राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। लेकिन इस फ़ैसले के बाद देश के कुछ कुँआरे मुस्लिम युवकों ने कोर्ट से एक नयी माँग कर डाली है। उन्होंने सर्वोच्च अदालत में अर्ज़ी लगाकर मांग की है कि तलाक़ तो बाद की बात है, पहले कोर्ट उनकी शादी का तो कुछ इंतज़ाम करे। इस माँग का देश भर के लाखों कुँआरे मुसलमान युवक समर्थन कर रहे हैं।

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शादी का इंतज़ार करते फुरकान भाई

अर्ज़ी दायर करने वालों में सीलमपुर के उस्मान भी हैं, जो पेशे से कार मैकेनिक हैं। अर्ज़ी डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए उस्मान ने कहा कि “भौत अच्छी बात है के देश की कोरट को तलाक़ वाले लोगों की फिकर हो रयी है। पर कोरट को उनके बारे में भी तो कुछ सोचना चहिये, जिनकी शादी ही नहीं हो पा रयी!”

उस्मान के साथ अर्ज़ी दायर करने वाले फुरकान, जो शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर केले का ठेला लगाते हैं, ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा, “आज के टैम में तलाक़ की टेंशन नहीं है, टेंशन है निकाह की! चार-चार निकाह कौन कर रिया है भाईसाब! यहाँ तो एक के ही लाले पड़े हुए हैं। इत्ता बता रिया हूँ, वो साला कोई चू@%# ही होगा, जो आज के टैम में तलाक़ देगा।”

फिर अपने सफ़ेद बालों की तरफ़ इशारा करते हुए फ़ुरकान बोले, “अगले महीने 42 का हो जाऊँगा, और अभी भी केले बेचता घूम रिया हूँ भाईसाब! कोई खाला या फुफ्फो होती तो थोड़ा-भौत चाँस भी होता, पर हमारी तो वो भी नहीं है!”

उधर, सुप्रीम कोर्ट के जज भी इन युवकों की माँग से दुविधा में पड़ गये हैं। चीफ़ जस्टिस खेहर ने यह मामला पांच जजों की संवैधानिक पीठ को सौप दिया है और सरकार से भी इस बारे में राय पूछी है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।



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