Monday, 23rd April, 2018

चलते चलते

गर्लफ़्रेंड घुमाते टोल-बूथ वर्कर ने कहा, "मुझे धुलाई का डर नहीं, मुझे तो हर हफ़्ते कोई नेता तबियत से धो जाता है"

14, Feb 2018 By Pagla Ghoda

बुद्धा पार्क, दिल्ली. तेईस वर्षीय टोल-बूथ कर्मचारी पवन कुमार बेचारेलाल उर्फ़ PKB, बुद्धा पार्क में अपनी गर्लफ़्रेंड सुजाता कुमारी के संग गलबहियाँ डाले खुलेआम बेख़ौफ़ घूम रहे थे। हमारे रिपोर्टर बच्चा यादव की नज़र उन पे पड़ी, तो वो उनसे बात करने वहाँ पहुँच गये। पेश है उस बातचीत के मुख्य अंश:

Toll Booth Employee
पवन कुमार की दो दिन पुरानी तस्वीर

पवन: अबे ये हाथ में रिपोर्टर वाला माइक क्या लिए आ रहे हो? आज के दिन तो लोग त्रिशूल लिए घूमते हैं। अब इसी माइक से मारोगे क्या?

रिपोर्टर: जी…मैं बजरंग दल से नहीं हूँ। मैं तो एक रिपोर्टर हूँ।

पवन: अच्छा, फिर तो और भी ख़तरनाक हो! ख़ैर, अभी हम अपनी डार्लिंग के साथ हैं, अभी हमें डिस्टर्ब मत करो!

रिपोर्टर: नहीं, मैं तो यही पूछना चाह रहा था कि आप ऐसे खुले-आम इज़हारे-मोहब्बत कर रहे हैं, आपको ‘एंटी-वैलेंटाइन डे’ वालों का डर नहीं है?

पवन: ज़्यादा से ज़्यादा वे क्या कर लेंगे…मार पीट ही करेंगे ना? उसकी तो अपने को आदत है। हम गुरूग्राम के टोल बूथ के कर्मचारी हैं भाई, हर हफ़्ते कोई मंतरी-संतरी, या उनका बेटा-दामाद अच्छे से पीट जाता है, अब तो आदत हो गयी है। ये देखो पिछले हफ़्ते ही एक नेता जी ने टोल देने से इनकार किया, मैंने नियम क़ानून बताए तो उन्होंने ये विकेट से यहाँ बहुत मारा। (शर्ट उठाकर सूजी हुई पसलियाँ दिखाते हैं)

रिपोर्टर: लेकिन हमने तो सुना है कि ‘त्रिवैलेंटाइन डे’ के दिन शूल भी घोंप दिए जाते हैं। आपको उसका तो डर होगा?

पवन: अबे तो वो कौन सी नयी बात है? तीन बार दो गोली चल चुकी हैं मुझ पे! ये देखो! चार-महीने पहले एक नेता जी के दामाद को एयरपोर्ट जाने की जल्दी थी, मैंने टोल माँगा तो धाँय-धाँय गोलियाँ दाग़ दीं मुझ पे। गोली कंधे के आरपार हो गयी। मालिक का शुक्र है किसी ज्वॉइंट को नहीं छेदा। (शर्ट खोल के कंधे का घाव दिखाते हैं)

रिपोर्टर: आप तो वाक़ई में ख़तरों के खिलाड़ी हैं।

पवन: और नहीं तो क्या! चलो अब निकलो, हम इतना ख़तरा उठा रहे हैं तो उसका मोल भी वसूलने दो!

रिपोर्टर: बस एक आख़िरी सवाल…

पवन: अर्रे ये रिपोर्टर ज़ात ऐसे नहीं मानेगा। यार वो झाड़ी देख रहे हो ना, उसके पीछे एक और कपल बैठा है। और वहाँ बेंच के ठीक पीछे दो जोड़ियाँ नैन लड़ा रहे हैं। और थोड़ा 20 मीटर आगे जाओगे तो पेड़ों का एक झुरमुट है, जहाँ थोड़ा अँधेरा है, वहाँ तो प्रेम की नदियाँ बह रही हैं, वहाँ जा के रास लीला करने वालों को भी थोड़ा तंग करो। हमें अब ज़रा बख़्शो!

रिपोर्टर: वो तो ठीक है पर …

पवन: बेटा अब अगर तुम यहाँ से नहीं खिसके ना, तो अपनी गर्लफ़्रेंड के संग तुम्हें पकड़वा देंगे हम! ये तो भाग लेगी तुम्हें फँसवा के, तुम जम के धोए जाओगे। फिर तुम्हें पता चलेगा जब त्रिशूल शरीर में घुसता है तो कहाँ-कहाँ दर्द होता है।

रिपोर्टर: जी, बस मैं जा रहा हूँ, मैं तो इस पार्क से ही जा रहा हूँ।

पवन: अच्छा बस हमारा ही टाइम ख़राब करने आए थे, फूटो! (रिपोर्टर माइक बगल में दबाकर तेज़ी से खिसक लेता है)



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