Monday, 23rd April, 2018

चलते चलते

'वैलेंटाइन डे' से ठीक पहले टेडी-बेयर की भारी बिक्री, हॉकी स्टिक्स की बिक्री में भी तीव्र उछाल

11, Feb 2018 By Pagla Ghoda

चोर बाज़ार, नयी दिल्ली. भारत की राजधानी दिल्ली से लेकर दूसरे बड़े शहरों जैसे मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में इस साल भी चौदह फ़रवरी को वैलेंटाइन के सुरीले स्वर भावी प्रेमी-प्रेमिकाओं को लुभाते नज़र आएँगे। इसी के मद्देनज़र, रंग-बिरंगे मासूम से दिखने वाले टेडी बेयर, महँगे गुलाब के गुलदस्ते और बहुत बड़े चॉकलेट बॉक्स में दो छोटी टॉफ़ी जैसी तथाकथित रोमांटिक चीज़ों की जमकर ख़रीदारी की जा रही है। पर इसी बीच हैरान कर देने वाला एक और ट्रेंड सामने आया है। वैलेंटाइन डे से ठीक पहले मज़बूत लकड़ी वाली हॉकी स्टिक और क्रिकेट की विकेट्स के प्री-ऑर्डर में भी जमकर इज़ाफ़ा हुआ है।

Teddy-Bear
टेडी बेयर पर हमला करने जाते बजरंग दल के कार्यकर्ता

चोर बाज़ार के बड़े नुक्कड़ पे अपनी छोटी से स्पोर्ट्स शॉप रन करने वाले बालवर्धन सिंह हुड्डा उर्फ़ ‘बल्ली ताऊ’ ने इस बाबत फ़ेकिंग न्यूज़ रिपोर्टर चंचल चौबे से बात की। अपनी सफ़ेद मूँछों को ताव देते हुए बल्ली ताऊ बोले, “बेट्टा जी, पिछले बाइस सालों से बैठे हैं जी हम यहाँ। पिछले कुछ सालों से तो ये पक्का ट्रेंड है के हर साल दस फ़रवरी से तेरह फ़रवरी तक, यानी कि बेलन-टीन डे से ऐन पहले, हमारी स्पोर्ट्स शॉप में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती सै। हॉकी स्टिक के जितने पीस हम इन तीन-चार दिन में बेचते हैं ना, उतने तो हम बाक़ी पूरे साल में नहीं बेचते। इब ये बताओ के इस देस में हॉकी खेलै कौण सै? पर म्हारी समझ में ये नी आती के इन तीन-चार दिन में लोगों को हॉकी का ऐसा क्या नसा चाड जात्ता है। और इस साल तो रिकॉर्ड टूट रहे हैं हॉकी की बिक्री के। हॉकी स्टिक नी मिलती तो लोग विकेट ले जाते हैं क्रिकेट के, बोलते हैं ताऊ जी है तो ये भी डंडा ही, इसी से हॉकी खेल लेंगे। हम भी कहत्ते है, कोई नी माराज जो जी चाहे ले जाओ।”

मकैनिकल और मशीन पार्ट्स की दुकान चलने वाले मंगलू मदारी ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए। अपने चेहरे से गहरा नीला ग्रीस पोंछते हुए मंगलू ने बताया, “पुश्तैनी तौर पे तो हम मदारी हुआ करते थे, लेकिन अब इंटरनेट के युग में बंदरों का खेल तो कोई देखता नहीं, तो हमने गाँव में जो तीन बीघा ज़मीन थी वो बेच के ये दुकान ले ली। वैसे तो ज़्यादा कहाँ ही चलती है पर फ़रवरी के इन दिनों में काफ़ी ग्राहक आते हैं। बड़े वाले लोहे के मोटे रेंच, मशीन में इस्तेमाल की जाने वाली हैवी लोहे की चैन और बाक़ी तेज़ औज़ार काफ़ी मात्रा मैं ख़रीद के ले जाते हैं। घर्र करके चलने वाली इलेक्ट्रिक आरी की भी कुछ ज़्यादा डिमांड रहती है, जो हॉलीवुड फ़िल्मों में ज़्यादातर ख़ूँख़ार मास्क वाले Friday 13 वाले क़ातिल इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हमें समझ नहीं आता के साल के बाक़ी दिन लोग अपनी मशीनें ठीक करने के लिए ये औज़ार क्यों नहीं लेते। फ़रवरी के इन दिनों में ऐसा क्या हो जाता है?”

मशहूर वैलेंटाइन विशेषज्ञ और जाने-माने मनोवैज्ञानिक कोकी कूलेरस भी इस हॉकी ट्रेंड को लेकर काफ़ी चिंतित हैं। एक गहरी साँस लेते हुए उन्होंने बताया, “क्यों इतना हॉकी स्टिक बिक रहा है इन दिनों में? कहीं इसका इस्तेमाल पार्कों में बैठे एक-दूसरे से प्रेम जता रहे बेचारे लव-बर्ड्ज़ को धमकाने-पिटवाने के लिए तो नहीं किया जाएगा? नहीं नहीं, मेरे ख़याल से हॉकी को लेकर नौजवान लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। अच्छी बात है, ऐसी जागरूकता का हम भरपूर स्वागत करते हैं।”



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