Monday, 26th June, 2017
चलते चलते

यूपी के लाल लंगोटवाले बाबा का दावाः मेरे मंतर के बाद आँधी-तूफ़ान में भी बंद नहीं होगा टाटा स्काई

14, Jun 2017 By बगुला भगत

डुमरियागंज. इधर हल्की सी हवा चलती है और उधर टाटा स्काई वालों का दिल धक-धक करने लगता है। बादल देखते ही पूरी फ़ैमिली ‘राधे-राधे’, ‘या अल्लाह’ और ‘वाहे गुरु तेरा ही आसरा’ करती हुई पूजा पे बैठ जाती है। क्रिकेट का कोई ज़बरदस्त मैच चल रहा हो और बारिश होने लगे? हे भगवान! फिर तो टाटा स्काई के कस्टमर गश खाकर गिर पड़ते हैं। बेचारे भारत की जीत की दुआ माँगने से ज़्यादा मौसम साफ़ रहने की दुआ माँगते हैं।

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टाटा स्काई की डिश पर मंत्र फूंकते डिशवाले बाबा

लेकिन इस बीच यूपी से एक ऐसी ख़बर आयी है, जिसे सुनकर टाटा स्काई के कस्टमर्स ख़ुशी से नाचने लगेंगे। यूपी के डुमरियागंज में रहने वाले लाल लंगोट वाले बाबा का दावा है कि उनकी झाड़-फूंक के बाद टाटा स्काई के सिग्नल बारिश में भी टनाटन आते रहते हैं और उसका प्रसारण कभी बंद नहीं होता। इलाक़े में ‘डिशवाले बाबा’ के नाम से मशहूर इन बाबाजी का तो यहाँ तक कहना है कि “मेरे मंतर मारने के बाद अगर डिश पे बिजली भी गिर जाये, तो वो भी बंद नहीं होता!”

इस ख़बर के फैलते ही बाबा के दरबार में टाटा स्काई के कस्टमर्स की भीड़ उमड़ रही है। चूंकि मॉनसून की बारिश शुरु हो चुकी है और आंधी-तूफ़ान की वजह से लाखों लोग चैंपियंस ट्रॉफ़ी का भारत-दक्षिण अफ्रीका वाला मैच नहीं देख पाये थे। और अब दो दिन बाद भारत-बांग्लादेश का सेमीफ़ाइनल है और उस दिन भी बारिश होने की आशंका है। इसलिये लोग अपने एंटीना पर मंतर फूंकने के बदले में बाबा को मुँह-मांगा चढ़ावा देने को तैयार हैं।

उधर, कुछ लोग डिशवाले बाबा को फ्रॉड बता रहे हैं। उनका आरोप है कि अगर सिग्नल नहीं आते हैं तो बाबाजी कह देते हैं कि तुम लोगों ने घर में मेरी बताई हुई पूजा-पाठ नहीं की। इस बीच,  केंद्र  सरकार ने बाबा के दावे की जाँच के लिये एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन कर दिया है, जो टाटा स्काई की सरकारी डिश लेकर डुमरियागंज के लिये रवाना हो चुकी है।



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