Tuesday, 12th December, 2017

चलते चलते

सुप्रीम कोर्ट में रखे कुर्सी, टेबल,पंखे,एसी,कंप्यूटर, प्रिंटर सब पहचानते हैं सुब्रमण्यम स्वामी को

28, Oct 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, सुप्रीम कोर्ट में इतने सारे केस लड़ रहे हैं की गिनना मुश्किल है, जिन लोगों को वे जेल में देखना चाहते हैं, वह लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है। जाहिर है, इसी सिलिसले में उन्हें हर रोज़ सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ता है। अब इंसान तो उन्हें अच्छी तरह जानते थे, लेकिन अब बेजान चीज़ें भी उन्हें पहचानने लगी हैं। हालत यह हो गई है कि सुप्रीम कोर्ट का पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा उनके चेहरे को पहचानता है। चाहे वो वहां रखी कुर्सी हो, टेबल हो, या पंखा,एसी,कंप्यूटर, प्रिंटर, कुछ भी! सब उन्हें अच्छी तरह जानते हैं।

जाने क्या होगा रामा रे
जाने क्या होगा रामा रे

सुप्रीम कोर्ट में “कुर्सी” का काम करने वाले फर्नीचर प्रसाद ने बताया कि, “भैया! पिछले पांच सालों से यहाँ मेरी पोस्टिंग है, और इन पांच सालों में मैंने सबसे ज्यादा स्वामी को ही यहाँ आते देखा है! पहले तो मुझे लगता था कि ‘स्वामी’ ही इस बिल्डिंग के स्वामी हैं, हर रोज़ यहाँ आते हैं! लेकिन बाद में टेबल भैया ने बताया कि, “नहीं यार! वो तो वकील है!” तब मुझे पता चला उनके बारे में!”

“किस तारीख को किस केस की सुनवाई है, कौन-कौन गवाह हैं, क्या सबूत हैं, किसको बुलाना है, किसको भगाना है, सब याद रखना पड़ता होगा! अब तो मुझे उनके “पीए” पर तरस आता है, बेचारा कैसे याद रखता होगा इतने सारे डेट्स!”-उन्होंने आगे बताया।

उधर, पड़ताल में पता चला है कि तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान, टिप्पणी करते हुए कहा था कि जिस दिन सुब्रमण्यम स्वामी कोर्ट नहीं आएँगे, उस दिन को “छुट्टी” घोषित किया जाता है। उसी आदेश का असर आज तक देखने को मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मेनगेट में लगा ताला, जब तक स्वामी को ना देख ले, खुलता ही नहीं है।

इस बारे में हमने सुब्रमण्यम स्वामी से विशेष बातचीत की। “आप कैसे कर लेते हैं इतना सब कुछ?”-जैसे सस्ते सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि, “मुझे सिर्फ दो काम करने में मज़ा आता है! पहला, कुछ लोगों को कोर्ट में घसीटना, और दूसरा, सुबह-सुबह उठकर ट्वीट करना!”-कहते हुए वे उन लोगों की लिस्ट दिखाने लगे, जिन्हें वे जेल भेजना चाहते हैं। हमारे रिपोर्टर ने बताया कि वह लिस्ट किसी बड़े होटल के मेनू-कार्ड से भी लंबी थी।



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