Thursday, 18th January, 2018

चलते चलते

मंदिरों में उपयोग होने वाली पूजा सामग्री पर ख़र्च कितना कर सकेंगे सुप्रीम कोर्ट करेगी तय

13, Jan 2018 By Guest Patrakar

एजेंसी. गोविंदा की मटकी और दिवाली की पटाखों के बाद अब देश की सर्वोत्तम न्यायालय आपकी पूजा की सामग्री पर करने वाले ख़र्चो पर केंची चलाने जा रही है। जी हाँ अब मंदिर में कितनी धूपबत्ती जलेगी, दिये में कितना घी डलेगा इस सबका फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट करेगी।

अब सुप्रीम कोर्ट बतएगा कि कौंसि अगर्बत्ती इस्तेमाल होगि
अब सुप्रीम कोर्ट बतएगा कि कौंसि अगर्बत्ती इस्तेमाल होगि

दरअसल मामला यह है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक PIL पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय लिया कि अब से पूजा की सामग्री पर ख़र्च होने वाले पैसों पर लगाम लगायी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस लोचा की अदालत में लिए गए इस फ़ैसले ने भारत के हर स्तंभ को हिला कर रख दिया।

जस्टिस लोचा ने फ़ेकिंग न्यूज़ से बातचीत के दौरान अपने निर्णय पर पूरा प्रकाश डाला। उन्हों बताया “इस फ़ैसले से किसी भी धर्म को जोड़ कर ना देखा जाए। यह फ़ैसला मैंने इसीलिए लिया है कि पूजा अधिक की सामग्री पर अधिक ख़र्च करने से पर्यावरण को नुक़सान पहुँचता है। धूपभत्ती और अगरबत्ती के धुएँ से इतना पलूशन फैलता है कि भारत के साथ साथ अन्य देशों में भी स्मॉग फैलने लगता है। आरती के दीपक में डलने वाले घी से दमा करने वाली बीमारियाँ पैदा होती है। इसीलिए हमने इसे पूर्ण रूप से ना रोकते हुए कम करने का फ़ैसला लिया है। इसे कम करने का सबसे अच्छा तरीक़ा यही था कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के ख़र्चे पर कुछ हद लगाम लगा दी जाए। जो कि मैंने किया”।

जस्टिस लोचा की इस दलील का बहुत लोगों ने खुल के स्वागत किया। मशहूर जर्नलिस्ट पगलिका बोस ने ट्वीट करते हुए कहा “ऐसे निर्णयो से ही भारत आज भी सेक्युलर देश माना जाता है। ज़्यादा पैसे ख़र्च करने से लोग ज़्यादा पूजा पाठ करने लगते है जिस से भारत के मायनॉरिटी ख़ुद को असुरक्षित महसूस करने लगते है”।

माना जा रहा है कि इस फ़ैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट रावण दहन को बंद करने की याचिका पर ध्यान देगी। अहमदाबाद की एक याचिका में यह ज़िक्र है कि रावण को दहन करने से जो प्रदूषण फैलता है उस से कैन्सर जैसी भयानक बीमारियाँ हो सकती है।

ख़ैर सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हर समुदाय के लोग चुप है। यहाँ तक कि लगातार ख़ुद पर लगते लगामों पर हिंदू भी चुप है शायद यह ही सोच कर कि कम से कम सुप्रीम और अन्य कोर्ट कोई काम तो कर रही है। वरना कोर्ट में पड़े 2 लाख से भी अधिक रेप और मर्डर के पेंडिंग केस देख कर सुप्रीम कोर्ट काम भी करती है यह विश्वास करना भी मुश्किल हो गया था।



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