Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

सुप्रीम कोर्ट ने तय की 'मन की बात' की भी लिमिट, कहा- "दो मिनट में ख़त्म करें मोदी जी अपनी बात"

30, Oct 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. दीवाली पर पटाखे बैन करने और महाकाल शिवलिंग पर पानी की लिमिट तय करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की गाज़ अब प्रधानमंत्री मोदी की ‘मन की बात’ पर गिरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि “मोदी जी अपने ‘मन की बात’ आधे घंटे के बजाय दो मिनट में ख़त्म करें और एक साल में सिर्फ़ दो बार ही करें, उससे ज़्यादा नहीं!”

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मन ही मन में ‘मन की बात’ करते मोदी जी

कोर्ट ने अपने इस एतिहासिक फ़ैसले में कहा है कि “अति किसी भी चीज़ की अच्छी नहीं होती। ज़रूरत से ज़्यादा ‘मन की बात’ से देशवासियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत ख़राब असर पड़ रहा है। इसकी ज़्यादा डोज से लोगों में चिड़चिड़ापन, अवसाद और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।”

“मोदी जी पिछले साढ़े तीन साल में 37 बार ‘मन की बात’ कर चुके हैं, हर महीने लगभग एक! एक ओर जहाँ, इस देश का आम आदमी पूरी ज़िंदगी किसी से अपने मन की बात नहीं कह पाता, वहीं मोदी जी हर महीने कर रहे हैं। और जिस बात को आप सिर्फ़ दो मिनट में कह सकते हैं, उस पर आधा घंटा खर्च करना कहाँ तक जायज़ है?” -फ़ैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा।

बीजेपी ने कोर्ट के इस फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है कि “यह प्रधानमंत्री मोदी जी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। जितना मसाला उनके अंदर भरा है, उस हिसाब से तो आधा घंटा भी बहुत कम है।”

“और अगर मोदी जी अपने मन की बात नहीं करेंगे तो क्या मनमोहन सिंह जी करेंगे!” -पात्रा ने तंज़ कसते हुए कहा।

उधर, जब से यह फ़ैसला आया है, प्रधानमंत्री मोदी तभी से गुमसुम हो गये हैं, उन्होंने ख़ुद को कमरे में बंद कर लिया है। वो ना किसी से बात कर रहे हैं और ना ही कुछ खा-पी रहे हैं। कमरे के अंदर से सिर्फ़ ‘मन की बात’ की रिकॉर्डिंग की आवाज़ आ रही है।



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