Thursday, 18th January, 2018

चलते चलते

खुलासा: केरल में साक्षरता दर है सिर्फ़ 80%, बाक़ी का 20% अकेले शशि थरूर ने संभाल रखा है

09, Jan 2018 By Ritesh Sinha

तिरुअनंतपुरम. माना जाता है कि केरल में हर आदमी कम से कम प्राइमरी तक तो पढ़ा ही है, इसलिए इसे 100% साक्षरता वाला राज्य भी कहा जाता है। लेकिन अब जाकर खुलासा हुआ है कि यह सरासर झूठ है। वहां की साक्षरता दर सौ प्रतिशत नहीं बल्कि सिर्फ 80% है, बाक़ी के 20% को अकेले शशि थरूर ने संभाल रखा है।

shashi tharoor
अपनी 20% इंग्लिश का प्रदर्शन करते थरूर

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (NSSO) का कहना है कि अकेले थरूर के ख़तरनाक ट्वीट्स की वजह से केरल का एवरेज बढ़ गया है। कई बार तो उनके ट्वीट की वजह से यह परसेंट सौ से भी ऊपर चला जाता है, जिसे राज्य सरकार किसी तरह खींचकर नीचे लाती है। हालाँकि, इसके अलावा थरूर के इस टैलेंट का क्या फायदा है, यह आज तक पता नहीं चल पाया है।

NSSO के मुख्य सर्वेकर्ता श्रीजीथ श्याम ने बताया कि “जब हम केरल में सर्वे कर रहे थे तो हमें बहुत से लोग ऐसे मिले, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे! लिटरेसी रेट जोड़-तोड़ के यही कोई 80% बैठ रहा था, लेकिन जैसे ही हम थरूर के घर से सर्वे करके निकले, अचानक से प्रतिशत बढ़ गया और 102 के भी ऊपर पहुँच गया! बस, तभी से लोगों को लग रहा है कि केरल में सब पढ़े-लिखे हैं, लेकिन सच्चाई तो सिर्फ़ हम जानते हैं ना!” -श्रीजीथ ने कॉलर चढ़ाते हुए कहा।

उधर, पंजाब सरकार भी कुछ तूफानी करने के मूड में है। मुख्यमंत्री अमरिंदर ने आदेश दिया है कि राज्य की साक्षरता दर में नवजोत सिंह सिद्धू को एडजस्ट किया जाए। सिद्धू भी शशि थरूर की तरह ही हैं, क्या बोलते हैं किसी के पल्ले नहीं पड़ता। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पंजाब सरकार ऐसा कर देती है तो पंजाब, केरल से भी आगे निकल जाएगा, क्योंकि सिद्धू तो अंग्रेेज़ी के साथ-साथ हिंदी और पंजाबी में भी कारनामे कर सकते हैं।



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